उपनिदेशक इस मामले की जांच करेंगे और पता करेंगे कि आखिर रामगंगा नदी में प्लास्टिक की बाल्टी कहां से आई। अगर नदी में बहकर बाल्टी आई है तो फिर उसमें ऐसा क्या था, जिससे बाघ बाल्टी को घेरे हुए थे।
बाघों के प्लास्टिक की बाल्टी को खाने का मामला बेहद गंभीर है। वन्य क्षेत्र में प्लास्टिक के प्रयोग पर पूरी तरह से बैन है। सीटीआर निदेशक राहुल ने बताया कि मामले की जांच उपनिदेशक को सौंपी गई है। जांच के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
बाघ मांसाहारी होते हैं। बाघ अक्सर जंगली सुअर, भालू, भैंस, जंगली मवेशी, प्रिय मृग और कमजोर या युवा हाथी शामिल होते हैं। जब बड़े शिकार उपलब्ध नहीं होते हैं तो वे छिपकली, केकड़े, टॉड, पक्षियों और मछली पर दावत के लिए जाने जाते हैं।
पहले भी वायरल हुई थी फोटो
2019 में कॉर्बेट रिजर्व क्षेत्र में पॉलिथीन चबाते एक तेंदुए की फोटो वायरल हुई थी। मामले में भी विभाग की ओर से जांच बैठाई गई थी।