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Uttarakhand: पांवटा साहिब वन प्रभाग के जंगल में पहुंचा बाघ, होगा अध्ययन, सहयोग के लिए जाएगी राजाजी की टीम

Thu, 18 Jun 2026 11:33 AM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

पांवटा साहिब वन प्रभाग के जंगल में बाघ पहुंचा। हिमाचल के वन महकमे के सहयोग के लिए राजाजी टाइगर रिजर्व की टीम जाएगी।

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बाघ (फाइल फोटो) - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल के पांवटा साहिब वन प्रभाग के जंगल में बाघ पहुंचा है। यहां पर पहली बार बाघ होने की वैज्ञानिक पुष्टि हुई है। इस बाघ के उत्तराखंड से पहुंचने की संभावना है। अब हिमाचल के वन महकमे के सहयोग के लिए राजाजी टाइगर रिजर्व (आरटीआर) की टीम भी जाएगी।

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इसके अलावा नए फोटोग्राफ आने मिलने पर आरटीआर अपने डेटा से मिलान भी करेगा, जिससे बाघ कहां से पहुंचा है उसके बारे में पता चल सके।हिमाचल के पांवटा साहिब वन प्रभाग है, यहां पर 10 जून को एक बाघ के पहुंचने की वैज्ञानिक पुष्टि हुई थी। जबकि बाघ देखे जाने की बात स्थानीय लोग करीब डेढ़ साल से कह रहे थे। हिमाचल का जंगल का उत्तराखंड से सटा हुआ है। उत्तराखंड में बाघों की अच्छी खासी संख्या है, ऐसे में संभावना है कि यह बाघ उत्तराखंड से पहुंचा है।

पांवटा साहिब वन मंडल के एसीएफ आदित्य शर्मा बताते हैं कि जहां पर बाघ देखा गया है, वहां और आसपास के जंगलों को देखा गया है। यहां के वृक्षों पर खरोंचे जाने के निशान दिखाई दिए हैं, यह उस तरह के निशान हैं जैसे बाघ अपनी टेरिटरी मार्किंग के लिए करता है। बाघ के संबंध में उत्तराखंड वन विभाग से भी लगातार संपर्क में हैं। इससे पूर्व वर्ष-2023 में शेर जंग नेशनल पार्क के कैमरा ट्रैप में बाघ के होने की पुष्टि हुई थी।

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लोगों को जागरूक किया जाएगा

एसीएफ आदित्य शर्मा बताते है कि जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें स्थानीय लोगों के बाघ के मूवमेंट के संबंध में जानकारी दी जाएगी।

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नए फोटोग्राफ का इंतजार, डेटा से कराया जाएगा मिलान

राजा जी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे बताते हैं कि हिमाचल प्रदेश में बाघ होने की पुष्टि हुई है। जो कैमरा ट्रैप में फोटो आया है, वह बहुत साफ नहीं है। अन्य कैमरा ट्रैप में साफ फोटो आता है, तो उससे राजाजी टाइगर रिजर्व के पास बाघों से जुड़े फोटोग्राफ के डेटा से से मिलान कराएंगे, जिससे पता चलेगा कि यह बाघ राजाजी टाइगर रिजर्व का है या अन्य जगह का है।

हिमाचल वन विभाग के सहयोग के लिए भी राजाजी टाइगर रिजर्व की टीम जाएगी। जो कि उस क्षेत्र की भौगोलिक समेत अन्य स्थितियों को देखने के साथ सुझाव देगी। आवश्यकता होने पर हिमाचल को कैमरा ट्रैप भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

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