बाघों ने अपने आशियाने ट्री लाइन के आसपास बना लिए हैं। समुद्र तल से 14 हजार फुट ऊंचे ट्री लाइन के यह वे इलाके हैं जहां पेड़, झाड़ियां खत्म होती हैं और बर्फ ही बर्फ रहती है।
पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग के ऊंचे इलाकों में बाघ की पुष्टि के बाद इसी ऊंचाई वाले अन्य क्षेत्रों में कैमरे लगाए जा रहे हैं। वन्य जीव विज्ञानियों की माने तो बाघ पहाड़ की सर्वाधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी आराम से रह सकते हैं।
पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग के अलावा दूसरे उन क्षेत्रों में भी बाघों की तलाश शुरू कर दी गई है जहां गाहे-ब-गाहे क्षेत्रीय लोग बाघ दिखने की सूचना देते रहे हैं। उस वक्त यह सोचकर विभाग ने ध्यान नहीं दिया कि तीन-चार हजार फुट से ऊंचे स्थानों पर बाघ नहीं जाते।
भारतीय वन्य जीव संस्थान के टाइगर सेल के अध्यक्ष डा. वाईवी झाला ने बताया कि बाघ समुद्र तल से 50 हजार फुट तक की ऊंचाई तक जा सकते हैं। इसके अलावा माइनस 50 डिग्री तक ठंड में जीवित रह सकते हैं। यानी माउंट एवरेस्ट भी बाघ का आश्रय स्थल बन जाए तो कोई आश्चर्य नहीं।
डा. झाला ने इसके लिए साइबेरिया का उदाहरण दिया और बताया कि बाघ को गर्म स्थानों पर रहने में अधिक दिक्कत होती है। जबकि ठंड को वे बर्दाश्त कर लेते हैं।
उन्होंने बताया कि वहां भी चीन से बाघ गए थे। साथ ही कहा कि अब बाघों के संभावित नए वास स्थलों में भी कैमरे लगाए जाएंगे। वन्य जीव विज्ञानी बाघों के ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने को हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान से जोड़कर देख रहे हैं। पुराने वास स्थलों का तापमान बढ़ने से बाघ ऊपर की तरफ जा रहे हैं।
बाघों की स्थिति
देश में कुल-2226 बाघ
कर्नाटक में 406 बाघ
उत्तराखंड में 340 बाघ
मध्य प्रदेश में 308 बाघ