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उत्तराखंड में तूफान ने दी दस्तक, तेज हवाओं और बिजली की आवाज से सहमे लोग

Tue, 08 May 2018 08:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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आंधी और तूफान - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में बीती देर रात बारिश के साथ आए तूफान ने लोगों की नींद उड़ा दी। तेज हवाओं का सिलसिला मंगलवार की सुबह भी जारी रहा। जिससे लोग सहमे-सहमे नजर आए।

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सोमवार रात करीब सवा बजे बिजली कड़कने की जोरदार आवाज से घरों में सो रहे लोगों की नींद खुली तो बाहर तेज हवाओं के साथ ही बारिश हो रही थी। इस दौरान दून के ज्यादातर इलाकों में बिजली गायब रही। तेज हवाओं से सीएम आवास के सामने बिजली के पोल गिर गए।

तेज हवाओं के बाद तूफान आने की आशंका के बीच बिजली कड़कड़ाने की आवाज से एकबारगी लोग सहम गए। करीब दस मिनट तक तेज हवाओं के साथ बिजली कड़कड़ती रही। इस दौरान कई इलाकों में बिजली गुल हो गई। 
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कई जगह दुकानों पर लगे बोर्ड और सड़कों पर लगे होर्डिंग्स टूटने की सूचना आई तो कई जगह पेड़ टूटकर गिरने की भी खबरे आईं। कुछ लोगों के घरों की खिड़कियां टूटने की भी खबरे आईं। समाचार लिखे जाने तक दून में तेज हवाओं का सिलसिला जारी था। तूफान से देहरादून के गढ़ी कैंट क्षेत्र में पेड़ गिर गया। 

आज तेज बारिश के साथ आंधी-तूफान आ सकता है

thunder storm - फोटो : amar ujala
उत्तराखंड के ज्यादातर क्षेत्रों में आज तेज बारिश के साथ आंधी-तूफान आ सकता है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने सभी जिलाधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। 

मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के दौरान प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में तेज बारिश और आंधी की आशंका जताई है। ज्यादातर स्थानों पर बारिश के साथ 70 से 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी आ सकती है। विभागीय बुलेटिन में आठ और नौ मई को तेज बारिश के साथ ओले गिरने का भी अनुमान जताया गया है। मौसम केंद्र देहरादून से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार रात से मौसम में बदलाव आया जो मंगलवार तक जारी रहा।

बुधवार को मौसम का मिजाज इसी तरह का बना रहेगा। मौसम केंद्र निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि अगले 48 घंटों के दौरान प्रदेश में मौसम खासा खराब रहेगा। वहीं, मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए आपदा प्रबंधन परिचालन केंद्र ने सभी जिलाधिकारियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आपदा प्रबंधन की समुचित व्यवस्था रखने और सभी तरह की तैयारियां रखने के निर्देश दिए हैं। 
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बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में हो रही बर्फबारी

snowfall
वहीं मंगलवार को तड़के से बदरीनाथ में बारिश और बर्फबारी का दौर जारी है। वहीं केदारनाथ धाम में भी बर्फबारी जारी है। मंगलवार की सुबह औली में भी बर्फबारी शुरू हो गई। पहाड़ में सोमवार को फिर मौसम ने करवट ली। केदारनाथ में सुबह से ही मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा। प्रात: 10 बजे के बाद शुरू हुई बारिश और बर्फबारी करीब साढ़े पांच घंटे तक जारी रहा।

बदरीनाथ जाने वाले करीब 2500 और बदरीनाथ से लौटने वाले लगभग 2000 तीर्थयात्रियों को लामबगड़ के दोनों ओर रोका गया है। तीर्थयात्री अपने वाहनों में ही हाईवे खुलने और मौसम सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। बदरीनाथ धाम में मौसम में आए परिवर्तन से ठंड बढ़ गई है। पुलिस की ओर से लाउडस्पीकर से बदरीनाथ धाम में तीर्थयात्रियों को भारी बारिश और बर्फबारी में सुरक्षित स्थानों में शरण लेने की सलाह दी जा रही है। हेमकुंड साहिब की यात्रा तैयारियों में मौसम ने खलल डाला है। सेना के जवान हेमकुंड साहिब के ट्रैक पर बर्फ हटाने के लिए यात्रा के प्रमुख पड़ाव घांघरिया से आगे नहीं जा पा रहे हैं। 25 मई को हेमकुंड साहिब के कपाट खुल जाएंगे। हेमकुंड साहिब ट्रैक पर अटलाकुड़ी से हेमकुंड तक तीन किलोमीटर के दायरे में अभी भी करीब चार फीट बर्फ जमी हुई है।

मौसम खराब होने बावजूद बाबा केदार के भक्तों के उत्साह में कमी नहीं आई। श्रद्धालु बरसाती ओढ़कर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। खराब मौसम के चलते केदारनाथ के लिए संचालित हेलीकॉप्टर सेवा भी साढ़े पांच घंटे प्रभावित रही। प्रात: छह बजे से गुप्तकाशी, फाटा व शेरसी हेलीपैड से सात हेली कंपनियों के हेलीकॉप्टर धाम के लिए उड़ान भरने लग गए थे, लेकिन 10 से दोपहर बाद 3.30 बजे तक खराब मौसम के कारण हेली सेवा बंद रही।

चमोली जिले में सोमवार अपराह्न आंधी-तूफान से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। जगह-जगह पेड़ टूटने से विद्युत लाइनें तहस-नहस हो गई। बदरीनाथ हाईवे पर पीपलकोटी में पेड़ टूटने से करीब सवा घंटे यात्रा वाहनों की आवाजाही ठप रही। चमोली से तीन किमी आगे क्षेत्रपाल में तेज आंधी-तूफान के दौरान पेड़ की टहनी सिर पर गिरने से दो तीर्थयात्री चोटिल हो गए। उधर, हेमकुंड साहिब यात्रा की तैयारियों में भी मौसम रोड़ा बन रहा है। रविवार को यात्रा तैयारियों के लिए हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हुई गुरुद्वारा प्रबंधन की टीम को बारिश-बर्फबारी के चलते अटलाकुड़ी से लौटना पड़ा।
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