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Iएक मई से 30 जून तक चलाया गया था अभियान, एडीजी कानून व्यवस्था ने की समीक्षाI
गुमशुदा लोगों को तलाशने के लिए चले ऑपरेशन स्माइल के माध्यम से पुलिस ने एक हजार से ज्यादा परिवारों की खोई मुस्कान लौटाई है। दो माह तक चले इस ऑपरेशन में 1370 गुमशुदा व्यक्तियों, महिलाओं और बच्चों को तलाश कर उनके परिवार से मिलाया गया। इनमें सबसे अधिक 514 महिलाएं शामिल हैं। जबकि 465 बच्चे और 391 पुरुष तलाशे गए। सबसे अधिक हरिद्वार 272 और देहरादून पुलिस ने 269 गुमशुदाओं की तलाश की है।
एक मई से 30 जून तक चले इस अभियान की एडीजी कानून व्यवस्था एपी अंशुमान ने समीक्षा की। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन स्माइल के लिए देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर, नैनीताल में चार-चार टीमें बनाई गई थीं। जबकि अन्य जिलों और रेलवे पुलिस की एक-एक टीमें गठित की गई थीं। इनमें एक-एक अभियोजन और एक टेक्निकल टीम का कर्मचारी शामिल था। यह अभियान वर्ष 2015 से समय-समय पर चलाया जा रहा है। इस कड़ी में दो महीने के भीतर पुलिस ने 1370 गुमशुदाओं को तलाशे हैं। इनमें चार गुमशुदा अन्य राज्यों में पंजीकृत हैं। इस दौरान एडीजी एपी अंशुमान ने उत्कृष्ट काम करने वाले टीम के प्रभारियों को सम्मानित भी किया।
सम्मान पाने वालों में ऊधमसिंहनगर की इंस्पेक्टर जीतो कांबोज, हरिद्वार के इंस्पेक्टर प्रदीप बिष्ट, देहरादून से दरोगा कल्पना पांडेय, विनयता चौहान और हरिद्वार से एएसआई देवेंद्र यादव शामिल हैं। एडीजी ने बताया कि ऑपरेशन स्माइल को भविष्य में भी चलाया जाएगा। इस संबंध में पुलिस को निर्देशित किया गया है कि वह अपने-अपने क्षेत्रों से गुमशुदा होने वाले लोगों की गहनता से जांच करें। उन्होंने बताया कि इस दो महीने के अभियान में अब तक सबसे अधिक गुमशुदा लोगों की तलाश की गई है।
Iकुछ बेहतर कहानियांI
उन्नाव से भाई के साथ निकली युवती को किया बरामद
यूपी के उन्नाव से काम की तलाश में अपने 13 वर्षीय भाई के साथ निकली 19 वर्षीय युवती को पुलिस ने उस वक्त बरामद किया, जब वह मुंबई जाने की तैयारी कर रही थी। युवती अपने भाई के साथ घर से कुंडल आदि लेकर ट्रेन में बैठकर कलियर शरीफ तक पहुंच गई थी। यहां पुलिसकर्मियों ने जब उनकी बातें सुनीं तो समझते देर न लगी कि ये अब यहां से निकलने वाले हैं। पुलिस ने दोनों को वहीं से अपने संरक्षण में ले लिया। पता चला कि इनकी गुमशुदगी का उन्नाव थाने में मुकदमा दर्ज है। एडीजी ने बताया कि यदि इन दोनों को ऑपरेशन स्माइल की टीम ने बरामद न किया होता तो शायद और भी मुश्किल हो जाती।
I17 साल बाद मिला था मोनूI
अपने घर से 17 साल पहले लापता हुआ मोनू शर्मा भी उत्तराखंड पुलिस के इस अभियान के तहत बरामद हुआ। इस संबंध में अमर उजाला ने भी समाचार प्रकाशित किया था। इससे पहले पुलिस टीम सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से मोनू के परिवार वालों की तलाश कर रही थी। इसी बीच मोनू की मां आशा शर्मा अमर उजाला की प्रति लेकर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट देहरादून पहुंचीं। यहां आशा शर्मा ने पुलिस का धन्यवाद किया। उनके परिवार को 17 साल बाद मोनू जैसे दूसरे जन्म के रूप में मिला।