देश के पवित्र धाम की सुरक्षा के लिए तीन दीवारों को बनाया गया है। यह दीवारें इटली और फिलीपींस की टेक्नीक से बनाई गई हैं। लेकिन इन दीवारों के राज आप नहीं जानते होंगे।
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केदारनाथ के पुनर्निर्माण के साथ वहां की सुरक्षा को लेकर भी नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने ठोस प्रबंध किए हैं। इटली और फिलीपींस देश में बाढ़ सुरक्षा और भूस्खलन प्रभावित जोन की सुरक्षा में इस्तेमाल होने वाली त्रिस्तरीय गेबिन वॉल, रॉक नेट वॉल और आरसीसी वॉल का निर्माण केदारनाथ में किया गया है। मंदाकिनी व सरस्वती नदी के किनारे से लेकर मंदिर के 100 मीटर पीछे तक बनी इन त्रिस्तरीय सुरक्षा दीवारों से आपदा या अन्य कारणों से केदारनाथ मंदिर व परिसर सुरक्षित रहेगा।
भारत में यह तकनीक पहली बार केदारनाथ धाम में उपयोग में लाई गई है, जो यूएसआई (यूरोपियन स्ट्रेटिकल इंस्टीट्यूट) से संस्तुत है। इस तकनीक के सहारे सुरक्षा दीवारों के निर्माण को लेकर निम द्वारा केदारनाथ में पुनर्निर्माण के कार्य में तकनीकी सहयोग दे रही आईआईटी रुड़की और सीबीआरआई के विशेषज्ञों के शोध, सुझाव पर किया गया है।
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मंदिर से 400 मीटर पीछे मंदाकिनी व सरस्वती नदी के किनारे अलग-अलग स्थानों पर वी आकार में पहली लियर, गेबिन वॉल बनाई गई है, जो नदियों के तेज बहाव की दिशा बदलने के साथ रफ्तार को कम करेगी। दूसरी लियर रॉक नेट वॉल, मंदिर से दौ सौ मीटर पीछे बनाई गई है, जो नदियों तेज बहाव में आने वाले बोल्डर व मलबे को रोकेगी और पानी की गति कम कर देगी। तीसरी लियर आरसीसी वॉल मंदिर से सौ मीटर पीछे बनी है, जो पानी को रोक देगी।
जानिए इन दीवारों की खासियत
गेबिन वॉल --
गेबिन वॉल, हाईटेन्सटाइन स्टील (खिंचाव युक्त स्टील का तार) और जीएस प्लास्टिक का बना जाल है। डबल लियर वाले इस जाल के बाहर जिंक और पीबीसी की परत लगी हुई है, जिससे यह पूरी तरह से सुरक्षित रहती है। तीन मीटर लंबा, एक मीटर चौड़ा और इतनी ही ऊंचाई वाले इस बॉक्स में तीन खाने हैं, जिसमें पत्थर भरे गए हैं। इन्हें वी आकार में नदी किनारों पर अलग-अलग दूरी पर लगाया गया है, जिससे बरसात या अन्य विषम कारणों से नदी के बढ़े पानी की दिशा बदकर बहाव कम हो जाएगा।
रॉक नेट वॉल --
जमीन से दो मीटर नीचे से लेकर जमीन से दो मीटर ऊपर तक 350 एमएम चौड़ाई के आईएसएमबी (इंडियन स्टैंर्डड मिडियम बिम) तीन-तीन मीटर की दूरी पर स्थापित किए गए हैं। प्रत्येक बीम पर छह मीटर ऊंचे लोहे के गार्डर (एक का वजन 350 किलो) सिमेंट मसाला, वैलडिंग व अन्य तकनीक से मजबूती से जोड़ा गया है। इसके बाद 200 एमएम के आईएसएमबी को तिरछे में 350 एमएम आईएसएमबी से जोड़ा गया है, जिससे बेस को मजबूती मिल रही है। छह मीटर ऊंचे गार्डरों पर 200एमएम सेंटर टू सेंटर16 एमएम सरिया का जाला बनाया गया है।
इस जाले के बाहर से मरकसी नेट (हाईटेंसटाइन स्टील और जीएस प्लास्टिक) लगा है, जो खिंचाव युक्त है। जब आपदा या नदियों के ऊफान में बोल्डर व मलबा आएगा, तो यह नेट अपनी क्षमता से पूरा खिंचेगा और पुन: वापस वास्वविक स्थिति में आकर बोल्डर व मलबे को आगे नहीं बढने देगा और पानी की निकासी हो जाएगी।
आरसीसी वॉल -
त्रिस्तरीय दीवार के तहत 350 मीटर लंबी और 12 फीट ऊंची आरसीसी सुरक्षा दीवार बनाई गई है। यह दीवार मंदिर से 4 सौ मीटर पीछे की तरफ बनाई गई है, जो गेबिन व रॉकनेट दीवार के जरिए रिसे मलबे व पानी को आगे नहीं बढने देगी। इस दीवार की सतह से टाइल्स युक्त दो फीट चौड़ा पैदल मार्ग भी बनाया गया है, जो मंदिर तक है। आरसीसी वॉल के ऊपर वाचिंग टावर लगाए जाएंगे, जिससे चोराबाड़ी ताल क्षेत्र की तरफ से मौसम की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। साथ ही थ्रीडी पेटिंग कर केदारनाथ आपदा से पहले और बाद का पूरा वर्णन भी किया जाएगा।
केदारनाथ मंदिर व केदारपुरी को किसी भी पानी के सैलाब से बचाने में त्रिस्तरीय सुरक्षा दीवारें सक्षम हैं। विशेषज्ञों के शोध, सुझाव और देखरेख में ये दीवारें बनाई गई हैं।
- कर्नल अजय कोठियाल प्राचार्य नेहरू पर्वतारोहण संस्थान
आईआईटी रुड़की व सीबीआरआई विशेषज्ञों के साथ इटली और फिलीपिंस में जाकर वहां, केदारनाथ जैसे विषम परिस्थतियों वाले स्थानों का जायजा लेने के बाद त्रिस्तरीय सुरक्षा दीवारों के निर्माण का निर्णय लिया गया था।
- संदेश अटेलकर, तकनीकी विशेषज्ञ, निम