देहरादून। आचार्य समय सागर महाराज के आशीर्वाद से भोपाल से तीन बहनें पलक, आकांक्षा और योगिता देहरादून पहुंचीं। गांधी रोड स्थित जैन भवन में माता पूर्णमति के संघ में उनका भव्य प्रवेश हुआ। आचार्य ने उन्हें श्वेत वस्त्र धारण करने और केशलोच के लिए आशीर्वाद दिया जिसके बाद उन्हें ब्रह्मचारिणी के पद से सुशोभित किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने तीनों बहनों का स्वागत किया और गुरुभक्ति का आयोजन हुआ।
धर्मसभा में गुरुमां पूर्णमति माता ने आत्मज्ञान, आत्मचिंतन, वैराग्य और आत्मकल्याण का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जीव ने बाहरी उपलब्धियों में जीवन व्यतीत कर दिया लेकिन यह नहीं जाना कि वह कौन है। आत्मा और शरीर कभी एक नहीं होते। मनुष्य प्रशंसा, प्रतिष्ठा, धन-संपत्ति आदि में लगा रहता है जबकि सबसे आवश्यक है यह समझना कि मैं शरीर नहीं ज्ञानस्वरूप आत्मा हूं। केवल अनंत ज्ञानी और परमात्मा के बारे में जान लेने से सुख नहीं मिलता। जब तक कि बाहरी पदार्थों से दृष्टि हटाकर अपने निज ज्ञानस्वरूप आत्मा को न पहचाना जाए। इस अवसर पर देहरादून सहित अन्य स्थानों से जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे।