फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रतिबंधित वन्य जीव पेंगोलिन की तस्करी में एसटीएफ और डब्ल्यूसीसीबी ने तीन लोगों को किया गिरफ्तार

Fri, 30 Aug 2019 08:19 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रपुर
विज्ञापन
पेंगोलिन
विज्ञापन

वन्य जीव-जंतुओं की तस्करी में लिप्त लोगों की धरपकड़ में जुटी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) कुमाऊं परिक्षेत्र और वाइल्ड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) ने वन्य जीवों की तस्करी करने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके पास से स्तनधारी सरीसृप वर्ग का एक पेंगोलिन बरामद किया है। पेंगोलिन जीव को दुर्लभ जीवों के शेड्यूल वन की श्रेणी में रखा गया है। 

विज्ञापन


बीते बुधवार एसटीएफ कुमाऊं परिक्षेत्र को दिनेशपुर क्षेत्र में वन्य जीव जंतुओं की तस्करी की सूचना मिली थी। साथ ही वन्य जीवों की तस्करी की एक सूचना नई दिल्ली स्थित वाइल्ड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो को भी मिली थी। सूचना पर एसटीएफ और डब्ल्यूसीसीबी ने दिनेशपुर क्षेत्र में संयुक्त रूप से छापा मारा। इस दौरान टीम को दिनेशपुर-जाफरपुर मोड़ पर एक कार में कुछ संदिग्ध लोग मिले। तलाशी लेने पर कार से टीम को दुर्लभ प्रजाति का एक पेंगोलिन बरामद हुआ।  टीम ने कार सवार तीन युवकों को हिरासत में ले लिया। 

पूछताछ में युवकों ने अपना नाम जुगल मिस्त्री निवासी सारनी थाना घोड़ा डोंगरी जिला बैतुल (मध्य प्रदेश), संजीव गाईन और अमरेंदर सिंह निवासीगण दिनेशपुर (रुद्रपुर) बताया। एसटीएफ कुमाऊं प्रभारी एमपी सिंह ने बताया कि ये लोग पेंगोलिन को बिलासपुर (यूपी) क्षेत्र से रुद्रपुर में बेचने के लिए लाए था। बरामद पेंगोलिन का वजन करीब 15 किलो तीन सौ ग्राम है। पेंगोलिन को दुर्लभ वन्य जीवों के शेड्यूल वन की श्रेणी में रखा गया है।
विज्ञापन


अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने भी इसे अपनी रेड लिस्ट में रखा है। इसके कारण इसकी तस्करी पूरी तरह से प्रतिबंधित है। पेंगोलिन को वन विभाग के सुपुर्द कर तीनों अभियुक्तों के खिलाफ दिनेशपुर थाने में वन्य जीव जंतु संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।

विज्ञापन

मांस से लेकर शल्क तक आता है काम 

चीन और वियतनाम जैसे देशों में पेंगोलिन का मांस खाया जाता है। वहीं, इसकी परतदार खाल (शल्क) का इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवा, ड्रग्स, बुलटप्रुफ जैकेट, कपड़े और सजावट का सामान बनाने में किया जाता है। विदेशों में इसकी कीमत करोड़ों में तो भारत में लाखों होती है।

फरवरी में मनाया जाता है वर्ल्ड पेंगोलिन-डे 
पेंगोलिन सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी विलुप्त होने की कगार पर है। इसके चलते इसके संरक्षण के लिए विश्व भर में प्रतिवर्ष फरवरी माह के तीसरे शनिवार को वर्ल्ड पेंगोलिन-डे (विश्व चींटीखोर दिवस) मनाया जाता है। शांत प्रवृति के इस जीव की प्रकृति संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन कहीं जादू-टोने के लिए और कहीं मांस तो कहीं शक्तिवर्धक दवा बनाने के लिए इसे मार दिया जाता है। 

टीम में ये लोग रहे शामिल
 टीम में वन क्षेत्राधिकारी रुद्रपुर रेंज, पंकज कुमार शर्मा, वन दरोगा मदनमोहन आर्या, गजेंद्र पाल सिंह, राधेश्याम और बीट आरक्षी मनोज कुमार सहित एसटीएफ के एसआई विनोद जोशी, कांस्टेबल विरेंद्र सिंह पापड़ा, महेंद्र गिरी, गुणवंत सिंह, राजेंद्र सिंह महरा, सुरेंद्र कनवाल और भूपेंद्र सिंह मर्तोलिया शामिल थे। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें