चीन और वियतनाम जैसे देशों में पेंगोलिन का मांस खाया जाता है। वहीं, इसकी परतदार खाल (शल्क) का इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवा, ड्रग्स, बुलटप्रुफ जैकेट, कपड़े और सजावट का सामान बनाने में किया जाता है। विदेशों में इसकी कीमत करोड़ों में तो भारत में लाखों होती है।
फरवरी में मनाया जाता है वर्ल्ड पेंगोलिन-डे
पेंगोलिन सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी विलुप्त होने की कगार पर है। इसके चलते इसके संरक्षण के लिए विश्व भर में प्रतिवर्ष फरवरी माह के तीसरे शनिवार को वर्ल्ड पेंगोलिन-डे (विश्व चींटीखोर दिवस) मनाया जाता है। शांत प्रवृति के इस जीव की प्रकृति संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन कहीं जादू-टोने के लिए और कहीं मांस तो कहीं शक्तिवर्धक दवा बनाने के लिए इसे मार दिया जाता है।
टीम में ये लोग रहे शामिल
टीम में वन क्षेत्राधिकारी रुद्रपुर रेंज, पंकज कुमार शर्मा, वन दरोगा मदनमोहन आर्या, गजेंद्र पाल सिंह, राधेश्याम और बीट आरक्षी मनोज कुमार सहित एसटीएफ के एसआई विनोद जोशी, कांस्टेबल विरेंद्र सिंह पापड़ा, महेंद्र गिरी, गुणवंत सिंह, राजेंद्र सिंह महरा, सुरेंद्र कनवाल और भूपेंद्र सिंह मर्तोलिया शामिल थे।