हिमालय की दुनिया जैव विविधताओं से भरी हुई है। खासतौर पर गढ़वाल हिमालय क्षेत्र में अब भी बहुत से जीवों के अस्तित्व को दुनिया के सामने लाना बाकी है। भारतीय वन्य जीव संस्थान ने भागीरथी बेसिन में इस साल तीन नई ड्रैगन फ्लाई खोजी हैं, इन ड्रैगन फ्लाई को अभी तक दुनिया में कहीं भी रिकार्ड नहीं किया गया है। इसके साथ ही एक नई प्रजाति का मेंढक भी भागीरथी बेसिन में मिला है। इन सभी का नामकरण किया जाना अभी बाकी है।
भारतीय वन्य जीव संस्थान के विज्ञानी भागीरथी बेसिन में जीवों की विविधताओं पर काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार के निर्देश पर यह सर्वे शुरू किया गया। यह कार्य देवप्रयाग, गंगोत्री क्षेत्र, निलांग घाटी आदि क्षेत्रों में चल रहा है। विज्ञानियों ने यहां नीलोगैस्टर, एनोटोगैसट्रेंड और सीफेशना वंश की तीन नई ड्रैगन फ्लाई की प्रजातियां खोजी हैं। इन्हें विश्व के किसी कोने में अभी तक नहीं देखा गया। वन्य जीव संस्थान अब इनके नामकरण की तैयारी कर रहा है। नामकरण होने के बाद इनकी तस्वीर दुनिया के सामने लाई जाएगी।
इसके साथ ही एक नए प्रकार का मेंढक भी दुनिया में पहली बार रिपोर्ट किया गया है। इसे एमोलोप्स मॉंटीकोला वंश की नई प्रजाति बताया जा रहा है। अभी तक उत्तराखंड के पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में दो प्रजातियां मिली ये एमोलोप्स फारमोसोस और अमोलोप्स जौनसारी हैं। जौनसार क्षेत्र में पाए जाने पर इसका नाम रखा गया है। मेंढक की जो नई प्रजाति मिली है, उससे मिलती-जुलती कुछ प्रजातियां दक्षिण चीन में हैं, लेकिन विज्ञानियों का दावा है कि भागीरथी बेसिन में मिले मेंढक की प्रजाति बिल्कुल अलग है।
पहली बार पश्चिम हिमालय में ड्रैगन फ्लाई की सात प्रजातियां रिकार्ड की गईं। इसके पहले ये प्रजातियां चीन, नेपाल, भूटान आदि क्षेत्रों में डेढ़ सौ से तीन सौ साल पहले रिकार्ड गई थीं। इनमें एशना मिक्स्टा, गाइनेकैंथा सुबिनटेरेप्टा, सीरियाग्रियोन फैलेक्स, सियुडेग्रियॉन माइक्रोसैफ्लम, ऐशना पेटेल्युरा, लिबेलल्युल्ला क्वाडरी मैक्युलेटा, प्रोटोस्टिकटा हैं।
भारतीय वन्य जीव संस्थान के निदेशक डॉ. वीबी माथुर के निर्देशन और सीनियर साइंटिस्ट डॉ. सत्य कुमार की अगुवाई में डॉ. अभिजीत भट्टाचार्य समेत 21 शोधार्थियों की टीम भागीरथी बेसिन में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में बेसिन के खेड़ाताल क्षेत्र से जंगली कुत्ता और सैंड फॉक्सपहली बार रिकार्ड की गई थी। इसके साथ ही इस साल उत्तरकाशी में ट्रैकिसकियम लीव सांप 105 साल बाद रिकार्ड किया गया है।