वर्ष 1947 में देश आजाद हुआ था। उस वर्ष का पंचांग आने वाले नव वर्ष संवंत्सर से काफी मिलता जुलता होगा।
देश के लिए शुभ
1947 की भांति नए पंचांग में भी 53 बुधवार पड़ेंगे जो बीच के वर्षों में कभी नहीं पड़े। संवत् के राजा और मंत्री दोनों पदों पर चंद्रमा आसीन होंगे। परिणामस्वरूप आने वाले नव संवत्सर को देश के लिए शुभ माना जा रहा है।
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गौरतलब है कि कुल मिलाकर 60 संवत् हैं जो एक के बाद एक आते रहते हैं। 60 वर्ष बाद उसी नाम का संवत् आता है जो 60 वर्ष पहले था। 60 संवतों में से 20-20 संवत् अनादि देव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास हैं। पिछले 20 वर्षों से विष्णु के संवत् चल रहे थे।
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मार्च में आ रहा नव संवत्सर 2071 शिव संवतों की शुरूआत करेगा। इसी के साथ शिवविंशति प्रारंभ हो जाएगी। भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार वर्ष 1947 और वर्ष 2014 में काफी समानता होगी। अनेक मुहूर्त उसी भांति पड़ रहे हैं, जैसे सन् 47 में पड़े थे।
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वर्ष के राजा और मंत्री पद पर प्रेम के देवता चंद्रमा का अधिकार होगा। उत्तरी भारत चूंकि भगवान शिव की कर्मभूमि रहा है, अत: इस भूभाग में और भी खुशहाली के आसार हैं।