इसका स्वाद अंजीर फल की तरह होता है। इसके अलावा यह वृक्ष काफी कम समय में 25 से 40 फुट का हो जाता है। इस वृक्ष को लगाने से जलवायु में होने वाले हानिकारक परिवर्तन में विराम लगेगा।
संस्थान के निदेशक डॉ. एमके नौटियाल ने इस वृक्ष को प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में लगाने का कार्य भी शुरू कर दिया है। संस्थान में इसकी नर्सरी तैयार की जा रही है। जल्द ही जैव प्रौद्योगिकी विभाग इस वृक्ष प्रदेश की बंजर भूमि और जंगलों को आबाद करने का प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है। इसे किसी भी भूमि पर आसानी से उगाया जा सकता है।
फल में पाए जाते हैं कई तत्व और विटामिन
डॉ. एमके नौटियाल ने बताया कि पौष्टिकता से भरपूर जमैका चेरी का उपयोग दुनिया के विभिन्न देशों में शरीर की आंतरिक सुरक्षा के लिए किया जाता है। इसका फल का आकार ब्लू बेरी की तरह होता है। यह पहले हरे, बाद में पीले रंग का रसीला फल बन जाता है। इसके फल में कई तत्व और विटामिन पाए जाते है। इसकी पत्तियों को चाय के साथ मिलाकर पीने से दिल की बीमारी, माइग्रेन और सिर दर्द नहीं होता है। फल का निरंतर उपयोग करने से मधुमेह की बीमारी पर भी नियंत्रण रहता है।