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Iहर बार की तरह इस बार भी अधिवक्ताओं के चुनाव में चेंबर निर्माण का मुद्दा सबसे गर्म रहेगा। इस बार पूरी राजनीति ही इसके इर्द-गिर्द घूमती नजर रही है। वर्तमान कार्यकारिणी के पदाधिकारी नए न्यायालय परिसर में जमीन आवंटन से लेकर इसे अपने नाम कराने तक के कार्य को भुनाना चाहेंगे। वहीं, अधिवक्ता राजनीति के कुछ दिग्गज अब तक चेंबर निर्माण न होने की बात उठाएंगे।I
Iदरअसल, देहरादून बार में एक-एक चेंबर में कई अधिवक्ता बारी-बारी से अपना काम करते हैं। अब जिला न्यायलय परिसर पुरानी जेल परिसर में शिफ्ट हो गया है। लगभग 10 सालों से इसी परिसर में अधिवक्ताओं के लिए चेंबर निर्माण की कोशिशें हो रही हैं। वर्ष 2023 में पांच बीघा जमीन अधिवक्ताओं के चेंबर के लिए आवंटित हो गई। इस पर बहुमंजिला इमारत के लिए नक्शा बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद वर्तमान कार्यकारिणी ने अधिवक्ताओं के अंशदान की व्यवस्था कर दी। बहुत से अधिवक्ताओं ने चेंबर निर्माण के लिए अपना अंशदान दे भी दिया। कई दिग्गज अधिवक्ता नेता अंशदान का विरोध करने लगे। इसी बीच विरोध शुरू हो गया कि वर्तमान जगह 60 बीघा से भी ज्यादा है तब भी अधिवक्ताओं को बैठने की जगह नहीं है। ऐसे में चार हजार अधिवक्ताओं के लिए पांच बीघा जमीन पर चेंबर निर्माण कैसे किया जा सकता है। ऐसे में पिछले साल चेंबर निर्माण का जो मुद्दा हल होता दिख रहा था वह अब भी जिंदा है।I