इस बार नवरात्रि पर महासंयोग बन रहा है। मान्यता है कि मां जगदंबा नवरात्रि में पालकी में बैठकर आएंगी और पालकी में ही बैठकर जाएंगी। ऐसे में देवी पूजन करने से पहले ये खबर जरूर पढ़ लें।
21 सितंबर से नवरात्रि की शुरुआत होगी जो कि 29 सितंबर को समाप्त होंगे। शारदीय नवरात्रि शक्ति मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का पर्व है। देवी पुराण में नवरात्रि में मां भगवती के आगमन एवं प्रस्थान के लिए दिन के अनुसार वाहन बताए गए हैं।
मां दुर्गा का पालकी में आगमन एवं गमन अति शुभ माना जा रहा है। यह संयोग जनजीवन के लिए हर प्रकार से सिद्धि देने वाला है। डा. आचार्य सुशांत राज के अनुसार इस बार गुरुवार के दिन हस्त नक्षत्र में घट स्थापना के साथ शक्ति उपासना का पर्व काल शुरू होगा।
ज्योतिषाचार्य गौरव आर्य के अनुसार इस बार नवरात्र में अति शुभ योग बन रहा है। जो भक्त नित्यप्रति मां जगदंबा की पूजा करेंगे उनकी मनोकामना पूर्ण होगी।
आगमन वाहन
बृहस्पतिवार के दिन हस्त नक्षत्र में यदि देवी आराधना का पर्व शुरू हो तो यह देवी कृपा एवं इष्ट साधना के लिए विशेष शुभ माना जाता है। देवी भागवत में नवरात्र के प्रारंभ एवं समापन के दिन के अनुसार देवी के आगमन के वाहन इस प्रकार बताए गए हैं।
आगमन वाहन
रविवार-सोमवार को हाथी
शनिवार-मंगलवार को घोड़ा
बृहस्पतिवार-शुक्रवार को पालकी
बुधवार को नौका आगमन
ऐसे करें कलश स्थापना
ऐसे करें कलश स्थापना
अगर आप घर में कलश स्थापना करना चाहते हैं तो सबसे पहले कलश पर स्वस्तिक बनाएं। फिर कलश पर कलावा बांधे और उसमें जल भरें। कलश में साबुत सुपारी, फूल, इत्र, पंचरत्न, अक्षत और सिक्का डाले।
घट स्थापना का शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त- प्रात: 11.46 मिनट से 12.34 मिनट तक
प्रात: 7.38 मिनट से 8.10 मिनट तक कन्या लग्न में
12.50 मध्याह्न से 1.42 मिनट तक
अखंड जोत के नियम
नौ दिन इन नौ स्वरूपों का होगा पूजन
शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री
अखंड जोत के नियम
पंडित रामभूषण के अनुसार जिन घरों में नवरात्र के दौरान अखंड ज्योत जलाई जाती है, उनमें मां की विशेष कृपा होती है लेकिन इसके लिए नियमों का पूरा पालन करना होता है। अखंड दीप जलाने वाले व्यक्ति को जमीन पर ही सोना चाहिए। ज्योत को बुझने नहीं देना चाहिए। इस दौरान घर में सफाई रखनी चाहिए।