इस खाद को बनाने में किसान को करीब 40 पैसा प्रति किलो की लागत आएगी, जबकि बाजार से उन्हें 35 से 40 रुपये प्रति किलो कंपोस्ट खाद खरीदनी पड़ती है। वह दून के थानो, कुमाल्दा समेत चार गांवों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ चुकी हैं, जहां कई किसानों ने पराली से कंपोस्ट खाद तैयार करनी शुरू की है। दून के तापमान पर इस खाद को तैयार होने में करीब 60 दिन का समय लगता है, जबकि गर्म स्थानों पर करीब 45 दिन लगते हैं।
उत्तराखंड जैविक बोर्ड में सीईओ के पद पर कई सालों तक सेवाएं दे चुकी बिनीता शाह नेगी ने कहा कि वह उत्तराखंड के अलावा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में किसानों को इस विधि से जोड़ रही हैं। इसमें काफी अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। वह 15 सालों से इस पर काम कर रही हैं।