उत्तराखंड में कार्बेट और राजाजी नेशनल पार्क के बाद तीसरा नया टाइगर रिजर्व सुरई रेंज में बनेगा। इसकी तैयारी पूरी हो गई है।
सुरई रेंज टाइगर रिजर्व देश का 49वां टाइगर रिजर्व है। उत्तराखंड के तराई पूर्वी वन प्रभाग में बनाया जा रहा यह टाइगर रिजर्व इसलिए भी खास होगा क्योंकि इसमें यूपी के पीलीभीत टाइगर रिजर्व से जुड़ा हुआ ‘वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर’ रहेगा। इससे बाघों के अलावा दूसरे वन्य जीव एक से दूसरे टाइगर रिजर्व में आसानी से आ और जा सकेंगे।
प्रदेश में बढ़ती बाघों की जनसंख्या के मद्देनजर सुरई रेंज टाइगर रिजर्व खटीमा और मिलपुरा रेंज के जंगलों को मिलाकर बनाया गया है। प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) दिग्विजय सिंह खाती ने सुरई रेंज टाइगर रिजर्व के लिए मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) की अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया था।
इसी हफ्ते कमेटी ने बैठक कर सुरई रेंज टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल घोषित कर दिया है। कमेटी ने नए टाइगर रिजर्व में आने वाले क्षेत्रों को तय कर दिया है। कमेटी में अंतरराष्ट्रीय संस्था वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) और भारतीय वन्य जीव संस्थान के विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
कमेटी के अध्यक्ष और मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) धनंजय मोहन ने बताया कि सुरई रेंज टाइगर रिजर्व के लिए 200 वर्ग किमी का क्षेत्र तय किया गया है। यह क्षेत्र लंधौर सैन्च्युरी और पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बीच है।
यह क्षेत्र वन्य जीवों के गलियारे के रूप में भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें बाघों के अलावा हाथी, गुलदार समेत अन्य वन्य जीव भी हैं। नया टाइगर रिजर्व बनाने के साथ ही कार्बेट और राजाजी पार्क के आसपास के जंगलों को भी बाघों की वास स्थली के नजरिये से सुरक्षित किया जा रहा है।
सुरई रेंज में प्रदेश का तीसरा टाइगर रिजर्व बनाने का काम पूरा हो गया है। विश्व में बाघों की सबसे अधिक संख्या भारत में है। देश और उत्तराखंड में भी बाघों की संख्या बढ़ रही है। इस वक्त प्रदेश में 340 बाघ हैं। इन्हें सुरक्षित वास स्थल देने के लिए कार्ययोजना पर अमल हो रहा है।
- धनंजय मोहन, मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) उत्तराखंड
कोटद्वार में टाइगर सफारी
कोटद्वार में टाइगर सफारी बनाने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। टाइगर सफारी में बाघों को लाकर रखा जाएगा और फिर बंद गाड़ियों में जाकर लोग बाघों को घूमते हुए नजदीक से देख पाएंगे।