नासिक कुंभ का तीसरा शाही स्नान आज (शुक्रवार) नासिक में होने जा रहा है। इसमें बैरागियों की तीन अणियां और 18 अखाड़े स्नान करेंगे। त्र्यंबकेश्वर में ऋषि पंचमी का स्नान नहीं होगा। यहां से लाखों श्रद्धालु नासिक पहुंच गए हैं।
नासिक कुंभ दो स्थानों पर आयोजित होता है। ऋषि पंचमी का तीसरा शाही स्नान केवल वैष्णव संतों द्वारा शाही जुलूस निकालकर किया जाता है। त्र्यंबकेश्वर में मौजूद संन्यासी, उदासी और निर्मल अखाड़े शाही जुलूस नहीं निकालते। अलबत्ता यह संत सामान्य स्नान करने अवश्य जाते हैं। कुछ संत नासिक जाकर रामघाट पर डुबकी लगाएंगे।
त्र्यंबकेश्वर की छावनियों में मौजूद लाखों श्रद्धालु शाही जुलूस देखने के लिए नासिक पहुंचे हैं। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदास के संयोजन में व्यापक तैयारियां बृहस्पतिवार को की गईं। दिगंबर, निर्मोही और निर्वाणी अणियों के श्रीमहंत व खालसा तैयारियों में जुटे रहे। अणियों के क्रमानुसार शाही स्नान तड़के चार बजे से शुरू हो जाएगा।
अध्यात्म पर टिकी है देश की एकता
नासिक सीता गुफा के समीप संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। स्वामी महादेव महाराज ने कहा कि देश की एकता अध्यात्म पर जिंदा है। जब तक हम अध्यात्मिक रूप से सशक्त रहेंगे हमारी एकता को कोई नहीं तोड़ सकता। संप्रदायों, मठों और समुदायों में बंटे होने के बावजूद अध्यात्मिक जगत क्रांति करने में सक्षम है। स्वामी ऋषीश्वरानंद ने कहा कि मनुष्य को अच्छे कर्म ही आगे ले जा सकते हैं।
सम्मेलन में स्वामी निरंजन महाराज ने कहा कि गोदावरी का जल आस्था को भांप लेता है। जो सच्चे भाव से डुबकी लगाता है। उसका मोक्ष निश्चित है। विनय सारस्वत ने कहा कि संतों का सानिध्य बड़े भाग्य से मिलता है।
गुरुजनों की सेवा अवश्य असर दिखाती है। विजय सारस्वती ने कहा कि यह धरती संतों के तप पर टिकी हुई है। सम्मेलन में योगी पवन नाथ, बाबा हठयोगी दिगम्बर, महंत दुर्गादास, स्वामी शिवानंद, सीता गुफा परमाध्यक्ष योगी महाराज, महंत रामदास, महंत जगदीश दास आदि ने भी विचार रखे।