विधानसभा चुनाव में इस बार हरिद्वार जिले के परिणाम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। हरिद्वार ग्रामीण सीट से मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्वयं उम्मीदवार बनने पर उन पर अब न सिर्फ अपनी सीट निकालने की जिम्मेदारी है बल्कि जिले के अन्य प्रत्याशियों को भी उम्मीदें हैं।
इस बात को ध्यान में रखते हुए सीएम भी जिले के अधिकतर प्रत्याशियों के चुनावी कार्यालय उद्घाटन से लेकर प्रचार तक में सक्रिय हैं। अब जिले का चुनाव परिणाम यह तय करेगा कि सीएम का ग्राफ पिछले तीन सालों में गिरा है या चढ़ा है। वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में हरिद्वार जिले की 11 सीटों में से पांच सीटें भाजपा ने जीती।
जबकि तीन पर बसपा और तीन पर कांग्रेस का कब्जा रहा। उसके बाद वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में हरिद्वार सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मुख्यमंत्री हरीश रावत की पत्नी रेणुका रावत को पराजित किया। रेणुका रावत तब चुनाव हारी जब उनके पति हरीश रावत मुख्यमंत्री थे। लेकिन, इसके बाद भी हरीश रावत की हरिद्वार जिले में सक्रियता कम नहीं हुई।
भगवानपुर से विधायक और कैबिनेट मंत्री रहे सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद वर्ष-2015 में उनकी पत्नी ममता राकेश को कांग्रेस में शामिल कराने के बाद उन्हें उपचुनाव में 36 हजार से अधिक मतों से जीत दिलाई। इसके बाद विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते गए मुख्यमंत्री की हरिद्वार में सक्रियता बढ़ती गई। अब कांग्रेस सरकार का पांच साल का कार्यकाल खत्म हो रहा है तो हाईकमान ने फिर हरीश रावत पर भरोसा जताया है।
जिले की अन्य सीटों पर भी CM की जवाबदेही तय
harish rawat
- फोटो : file photo
हरीश रावत हाईकमान के विश्वास और जनता की उम्मीदों पर कितना खरे उतरे, इसका फैसला भी अब हरिद्वार जिले की जनता के हाथ में है। यही कारण है की मुख्यमंत्री पर न सिर्फ अपनी सीट निकालने की जिम्मेदारी है। बल्कि, जिले की अन्य सीटों पर भी उनकी जवाबदेही तय है। इसी वजह से मुख्यमंत्री जिले में अधिकतर प्रत्याशियों के चुनावी कार्यालय उद्घाटन में भी पहुंच रहे हैं।
शुक्रवार को उन्होंने लक्सर से कांग्रेस प्रत्याशी हाजी तस्लीम के चुनावी कार्यालय का उद्घाटन किया। शनिवार को भगवानपुर से कांग्रेस प्रत्याशी ममता राकेश और झबरेड़ा से कांग्रेस प्रत्याशी राजपाल के चुनावी कार्यालय उद्घाटन में शामिल हुए। ऐसे में इस बार यह देखने वाली बात होगी कि जिले में भाजपा का वर्चस्व बरकरार रहेगा या फिर मुख्यमंत्री का जनाधार बढ़ेगा। इनसेट
हरिद्वार ग्रामीण के साथ खानपुर और रुड़की पर पैनी नजर
हरिद्वार ग्रामीण के साथ रुड़की और खानपुर सीट पर भी मुख्यमंत्री हरीश रावत की पैनी नजर है। माना जा रहा है कि यहां टिकट दिलाने से लेकर सियासी समीकरण मुख्यमंत्री ने स्वयं तय किए हैं। यही नहीं इन सीटों पर हर हाल में कांग्रेस से बागी होकर भाजपा से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को शिकस्त देने की तैयारी चल रही है।
जैन के लिए करो या मरो का सवाल
रुड़की सीट पर सुरेशचंद जैन के लिए इस बार करो या मरो की स्थिति है। दो बार भाजपा विधायक रहे जैन टिकट नहीं मिलने पर कांग्रेस में शामिल हुए। इसके बाद इन्हें कांग्रेस से टिकट दिया गया। कांग्रेस सीट से प्रमुख दावेदार रहे मेयर यशपाल राणा को मनाने में सीएम की भूमिका अहम रही। लेकिन यह प्रयास जीत में तब्दील हो पाता है या फिर नहीं। यह चुनावी नतीजे ही बता पाएंगे।