रुद्रपुर जिले में छैमार, भातु और बावरिया गैंग के सदस्य पूर्व में वारदातों को अंजाम देकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराते आए हैं। जिले में घटी पुरानी घटनाओं पर नजर दौड़ाएं तो करीब 12 वर्ष पहले रुद्रपुर की शांति विहार कॉलोनी में लाखों की डकैती पड़ी थी। मामले में पुलिस ने मेरठ के झिझाना से बावरिया गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार किया था।
वर्ष 2013 में काशीपुर के मानपुर में हुई डकैती की घटनाओं में पुलिस ने स्थानीय के अलावा छैमार गैंग के सदस्यों को भी गिरफ्तार किया था। वर्ष 2014 में काशीपुर के पैगा में हुई डकैती का पुलिस खुलासा नहीं कर सकी है। वर्ष 2015 में ट्रांजिट कैंप थाना क्षेत्र में टीवीएस लुकास फैक्ट्री में गार्ड को बंधक बनाकर डकैती डालने वाले बदमाशों को पुलिस ने जेल भेजा था। इसमें एक आरोपी पीलीभीत निवासी अतर कादरी पर आठ तो मिलक रामपुर के रहने वाले लईक उर्फ छैला पर लूट, रोड होल्डअप के 14 मुकदमे दर्ज थे। वर्ष 2016 में ही गंगापुर रोड में व्यापारी के घर डकैती डालने के मामले में पुलिस ने स्थानीय के अलावा बिलासपुर और चंडीगढ़ से पांच डकैतों को गिरफ्तार किया था।
19 जून 2017 को काशीपुर की मानव विहार कॉलोनी में हुई डकैती में पुलिस ने छैमार गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया था। बीते वर्ष काशीपुर के जसपुर खुर्द में फाइनेंस कंपनी के दफ्तर में हुई लूट में बुलंदशहर के बदमाश गिरफ्तार किए गए थे। इन सभी मामलों में गिरफ्तार बदमाशों का संबंध कहीं न कहीं इन गैंगों से था। लिहाजा, पुलिस पूर्व में पड़के गए बदमाशों की लोकेशन और इन गैंग की सक्रियता को लेकर जानकारी जुटा रही है।
छैमार गैंग - मूल रूप से पंजाब के बदमाशों का यह क्रूर गैंग माना जाता है। यह लोग खिड़की की ग्रिल उखाड़कर भीतर दाखिल होने के बाद लूट के बाद हत्या को भी अंजाम देने से गुरेज नहीं करते हैं। रेकी करने के लिए स्थानीय बदमाश की मदद ली जाती है।
भातु गैंग - मुरादाबाद का भातु गैंग दिल्ली, गाजियाबाद, गुजरात, हरियाणा, उत्तराखंड, जयपुर और यूपी में सक्रिय रहा है। गैंग के बदमाश डकैती और लूट की वारदात को अंजाम देते हैं। गैंग के लोग लगातार ठिकाने बदलते रहते हैं।
बावरिया गैंग - यह गैंग खानाबदोश है, जो संगठित होकर राजस्थान, यूपी, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में लूट और डकैती को अंजाम देता रहता है। यह लोग अलग-अलग समूहों में बंटकर वारदात करते हैं और वारदात के बाद ट्रेन से कहीं दूर रवाना हो जाते हैं।
पारदी गैंग - यह मूल रूप से पारदी जाति के लोग होते हैं। यह गैंग मध्यप्रदेश में खासा सक्रिय हैं। इसके अलावा गैंग के बदमाशों के खिलाफ गुरुग्राम, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात में मामले दर्ज हैं। इस जाति के लोगों में रिश्ते भी अपराध को देखकर तय होते हैं। यह गैंग भी खिड़की और दरवाजों के ग्रिल उखाड़कर अंदर घुसता है तो वारदात के दौरान हत्या करने से भी नहीं चूकता है। यह लोग पुलिस से बचने के लिए रेहड़ी लगाते हैं और रात को वारदात करते हैं।
यूपी की सीमा से सटा होने की वजह से ऊधमसिंह नगर जिला हमेशा की बदमाशों के निशाने पर रहता है। पुलिस कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले में ढाई वर्षों में डकैती की 12 और लूट की 108 घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2016 में सात डकैती और 29 लूट हुई थीं। वर्ष 2017 में चार डकैती और 59 लूट की घटनाएं घटित हुईं। इसके अलावा, इस वर्ष अभी तक एक डकैती और लूट की 20 घटनाएं हो चुकी हैं। पुलिस अधिकांश घटनाओं का खुलासा कर बदमाशों को जेल भेज चुकी है। हालांकि, बीते 27 दिसंबर 2015 की रात मॉडल कॉलोनी में हुई डकैती की घटना का खुलासा नहीं होने पर उस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है।
अपर्णा और अक्षिता के ऊपर था कपड़ों का ढेर
प्रोडक्शन मैनेजर पंकज श्रीवास्तव के घर घुसे बदमाशों ने उनकी पत्नी अपर्णा की हत्या कर दी थी। पंकज भी बदमाशों के वार से अचेत होकर बेड से नीचे गिर गए थे। इसके बाद बदमाशों ने अलमारी में कीमती सामान और नकदी खंगालने के चक्कर में कपड़े निकालकर बेड में मृत पड़ी अपर्णा के ऊपर फेंके थे। कपड़ों से अपर्णा का शव पूरा ढक गया था। इसके अलावा, अक्षिता के ऊपर भी कपड़े डाले थे। जब वारदात की जानकारी के बाद लोग कमरे में गए तो उन्हें जमीन पर गिरे पंकज ही दिख रहे थे। बाद में जब लोगों का ध्यान बेड पर पड़े कपड़ों के ढेर में गया तो अपर्णा का शव और बच्ची दिखी।