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Dehradun News: रिस्पना-बिंदाल की सेहत नहीं सुधार सकी एसटीपी की डोज, नदियों में छोड़ा जा रहा सीवेज

Thu, 16 Nov 2023 06:35 PM IST
देहरादून ब्यूरो अश्वनी त्रिपाठी, अमर उजाला, देहरादून

सार

शहर से रोजाना औसतन 115 एमएलडी सीवरेज निकलता है। इसके निस्तारण के लिए कारगी, मोथरोवाला में दो, विजय काॅलोनी, इंदिरा नगर और जाखन में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाए गए हैं।
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रिस्पना नदी - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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रिस्पना और बिंदाल नदी प्रदूषण से कराह रही हैं। गंदगी से मरणासन्न हालत में पहुंचीं यह नदियां सिर्फ मैला ढोने का जरिया बनकर रह गई हैं। इन दोनों नदियों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए एसटीपी लगाए गए हैं, ताकि नदियों का जल प्रदूषित न हो। लेकिन शहर के बड़े हिस्से में सीवर लाइन नहीं होने के कारण सीवेज नदियों में सीधे प्रवाहित किया जा रहा है। इस कारण एसटीपी से ट्रीट होकर निकलने वाला पानी भी नदियों की सेहत सुधार नहीं पा रहा है।

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शहर से रोजाना औसतन 115 एमएलडी सीवरेज निकलता है। इसके निस्तारण के लिए कारगी, मोथरोवाला में दो, विजय काॅलोनी, इंदिरा नगर और जाखन में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाए गए हैं। लेकिन, अभी शहर का बड़ा हिस्सा सीवर लाइन से अछूता है। ऐसे में यहां का सीवेज सीधे नदियों में गिराया जाता है। हालांकि रिस्पना में गिर रहे नालों की टैपिंग के साथ ही नदी किनारे की बस्तियों से निकलने वाले सीवेज को एसटीपी से जोड़ने की योजना पर काम जारी है, लेकिन इस प्रोजेक्ट में पूरी सफलता नहीं मिल पाई है। इस कारण मजबूरी में बिना ट्रीट हुए पानी को नदी में छोड़ा जा रहा है। यह नदियां आगे जाकर सुसवा और सौंग नदी में मिल जाती हैं, ऐसे में इसका खामियाजा इन दोनों नदियों को भी उठाना पड़ रहा है।

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रिस्पना-बिंदाल में पीएच गड़बड़

नदियों के पानी में पीएच महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पौधों और जंतुओं के अस्तित्व के लिए पीएच का सही अनुपात में होना महत्वपूर्ण है। रिस्पना और बिंदाल में पीएच सही अनुपात में नही होने के कारण पेड़ पौधों और जानवरों के लिए यह जल नुकसानदायक है। यही वजह है कि इन नदियों का जल किसान खेती के लिए प्रयोग नहीं करते।

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30 तक हो बीओडी, 170 तक पहुंच रहा

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक पानी में बीओडी अर्थात बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड की मात्रा 30 से अधिक नहीं होनी चाहिए, लेकिन सीधे प्रवाहित किए जा रहे सीवेज में यह 170 तक पहुंच रहा है। यही सीवेज नदियों में जाकर पानी में आक्सीजन की मात्रा को कम कर रहा है

 

सीवेज को ट्रीटमेंट प्लांट में ठीक तरह से शोधन करने के बाद पानी को नालों और नदियों में प्रवाहित किया जा रहा है। ट्रीटमेंट किए गए पानी की गुणवत्ता बहुत अच्छी आ रही है, इससे नदियों में किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं हो रहा है।

- आशीष भट्ट, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान

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