देहरादून। राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में पिछले पांच साल में हुए कार्यों की जांच की जाएगी। प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने वित्तीय घोटालों की जांच का आदेश दिया है। जांच के लिए अपर प्रमुख वन संरक्षक (प्रशासन एवं वन्यजीव सुरक्षा) के नेतृत्व में चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का भी गठन कर दिया गया है। यह समिति राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के अंतर्गत कम से कम पांच साल में हुए कार्यों का मौके पर सैंपलिंग के आधार पर यथासंभव भौतिक सत्यापन करने के साथ ही कार्यों के सापेक्ष वित्तीय नियमों के अनुपालन से संबंधित अभिलेखों की भी जांच करेगी।
राजीव मेहता, दिनेशचंद पांडे व आदित्य शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई गई थी कि राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क की मोतीचूर रेंज में तमाम वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्य वन संरक्षक मानव संसाधन विकास एवं कार्मिक प्रबंधन को आरोपों की जांच सौंपी गई।
जांच अधिकारी ने मोतीचूर रेंज में की गई जांच में पाया कि लंबी दूरी गश्त से संबंधित फील्डकर्मियों को गश्त के दौरान भोजन, विराम की व्यवस्था के नाम पर एक हजार रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान किया गया, जो वित्तीय नियमावली के विरुद्ध है। साथ ही अधिकारियों की मिलीभगत से प्राकृतिक वास सुधार के नाम पर लैंटाना घास उन्मूलन के कार्य किए बिना भुगतान की बात सामने आई। खास बात तो यह है कि पार्क के अधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलीभगत करके ऐसे घने वन क्षेत्रों के सापेक्ष भी बिल बनाया जहां लैंटाना पाई ही नहीं जाती है।
ठेकों के आवंटन में भी अधिकारियों ने भी घालमेल
मुख्य वन संरक्षक की जांच में यह बात सामने आई कि ठेकों के कोटेशन और बिलों में भी कई तरह की खामियां पाई गईं। सभी ठेकेदारों के कोटेशन में एक समान भाषा व फॉन्ट होना पाया गया है। एक ही नंबर के दो बिल पाए गए हैं। तीन सामग्रियों के तीन बिलों पर एक ही व्यक्ति के हस्ताक्षर हैं और वह भी अलग-अलग तीन प्रकार से किए गए हैं। जो टाइगर रिजर्व में वित्तीय घोटाले को उजागर करता है।
अधिकारियों के मौखिक आदेश पर ठेकेदारों ने कराए निर्माण कार्य
प्रथम दृष्टया जांच में यह बात सामने आई है कि पार्क के अधिकारियों के मौखिक आदेश के आधार पर ही कई ठेकेदारों ने निर्माण कार्य करा दिए गए। अधिकारियों और ठेकेदारों की करतूत उस समय उजागर हो गई जब जांच अधिकारी के सामने कई ठेकेदार पेश हुए और उन्होंने लाखों रुपये के उसे भुगतान की मांग कर दी।
उच्च स्तरीय जांच समिति में एपीसीसीएफ के अलावा तीन अधिकारी शामिल
प्रमुख वन संरक्षक जयराज की ओर से गठित की गई उच्चस्तरीय जांच समिति में अपर प्रमुख वन संरक्षक प्रशासन के अलावा मुख्य वन संरक्षक कार्मिक प्रबंधन, वित्त नियंत्रक व अवैतनिक वन्यजीव प्रतिपालक राजाजी टाइगर रिजर्व को शामिल किया गया है। समिति दो माह में जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट प्रमुख वन संरक्षक के रूप को सौंपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।