अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून/नौगांव (उत्तरकाशी)/ कर्णप्रयाग। राज्य में कई तहसील, उप तहसील बनाने की घोषणाएं हुईं। इसके बनने के बाद से लोगों को उम्मीद थी कि उससे जुड़े कार्याें के लिए सहूलियत मिलेगी पर हालत यह है कि दोनों मंडलों में कई तहसीलें कागजों से बाहर नहीं आ सकी हैं। बागेश्वर के शामा उपतहसील में कुछ कामकाज शुरू भी हुआ है पर यहां पर अधिकारी ही तैनात नहीं हैं।
गढ़वाल मंडल
बर्निगाड उपतहसील आज भी कागजों में हो रही संचालित
नौगांव (उत्तरकाशी)। गोडर, खाटल और मुंगरसंति पट्टी के 55 गांव का उपतहसील का सपना मुख्यमंत्री की घोषणा के आठ साल बाद भी साकार नहीं हो पाया है। वर्ष 2017 में गठित बर्निगाड उपतहसील आज भी कागजों में संचालित हो रही है। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 2016 में बर्निगाड उपतहसील की घोषणा की थी। राजस्व अनुभाग ने जनवरी 2017 में अधिसूचना जारी कर बर्निगाड को उपतहसील का दर्जा दिया था। उपतहसील के लिए भूमि भी चिह्नित की गई लेकिन पदों का सृजन न होने से आठ वर्ष बाद भी उपतहसील अस्तित्व में नहीं आ पाई। राजस्व विभाग की अधिसूचना में तीयां, दारसौं, कुंवा, गढ़, गातू और कंडारी छह राजस्व निरीक्षक क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले 55 राजस्व गांव को बड़कोट तहसील की सीमा से पृथक कर बर्निगाड उपतहसील में शामिल किया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि अब उन्हें पचास किमी दूर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। लेकिन घोषणा के आठ वर्ष बाद भी उपतहसील अस्तित्व में नहीं आ पाई।
देवाल तहसील का आठ साल बाद भी नहीं हो पाया संचालन
चमोली जिले की देवाल तहसील का आठ साल बाद भी संचालन नहीं हो पाया। 25 जुलाई 2016 को सृजित देवाल उपतहसील को 3 जनवरी 2017 को उच्चीकरण होकर पूर्ण तहसील बनाया गया लेकिन संचालन आज तक नहीं हो पाया। इस तहसील का संचालन अब भी मूल तहसील थराली से हो रहा है। जनपद चमोली के अंतर्गत देवाल, नंदानगर, नारायणबगड़ व नंदप्रयाग तहसील सृजन की अधिसूचना एक साथ जारी हुई। देवाल तहसील को छोड़कर सभी नव सृजित तहसीलों का संचालन हो गया। कानूनगो, नायब नाइजर व डाटा इंट्री आपरेटर के पद भी सृजित किए गए। 3 जनवरी 2017 को उप तहसील का उच्चीकरण पूर्ण तहसील में पद सहित हुआ। 81 राजस्व ग्राम इसमें शामिल किए गए हैं। इंद्र सिंह राणा, महावीर बिष्ट, पूर्व प्रमुख डीडी कुनियाल ने कहा कि तहसील का संचालन नहीं होने से क्षेत्र के लोगों को प्रमाणपत्र बनाने के लिए दो दिन का समय लग जाता है। वहीं विधायक भूपाल राम टम्टा ने कहा कि तहसील में तहसीलदार सहित सभी सृजित पदों में नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है। शीघ्र तहसील के संचालन की उम्मीद है।
यहां भी कमोबेश यही हाल
इसी तरह मसूरी में तहसील बनाने वर्ष-2023 में मोहर लगी थी, पर उसके आगे की अभी प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। हरिद्वार जिले में भी दो तहसील के शुरू होना बाकी है। इसमें नारसन और लालढांग तहसील खोलने की बात हुई। पर यहां भी इंतजार जारी है। नारसन और लालढांग तहसील से जुड़े कामकाज के लिए अभी लोगों को क्रमश: रुड़की और हरिद्वार जाना पड़ता है।
-
कुमाऊं मंडल में कमोबेश यही स्थिति
कुमाऊं मंडल में भी कमोबेश यही हाल है। मंडल मुख्यालय नैनीताल जिले में रामगढ़ तहसील खोलने की घोषणा-2016 में हुई थी। पर यह तहसील वजूद में नहीं आ सकी है। अभी लोगों को कामकाज के लिए नैनीताल (नैनीताल तहसील) जाना पड़ता है। बागेश्वर जिले में शामा उपतहसील खुली, पर अधिकारी ही तैनात नहीं है। काफी कामकाज के लिए लोगों को कपकोट तहसील में जाना पड़ता है। अल्मोड़ा जिले में धौलछीना और धारी में तहसील का कार्य शुरू नहीं हो सका है।सचिव राजस्व एसएन पांडे का कहना है कि कुछ जगहों पर तरह इंफ्रास्ट्रक्चर न हो, पर बहुत सारा कामकाज आनलाइन होता है, जिसे किया जा रहा है।