कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से जुड़े खाताधारकों के लिए राहत भरी खबर है। अब मृतक कर्मचारियों के आश्रितों के क्लेम का निपटान एक ही दिन में किया जाएगा। इसके साथ ही सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को भी उनके पीएफ का भुगतान एक दिन के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल सिस्टम को सुदृढ़ बनाने के लिए सीआईटीईएस को लागू किया जा रहा है।
शुक्रवार को यह बात ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त अजय के मेहरा ने कही। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में करीब 9,744 अंशदायी प्रतिष्ठान और 7,74,377 सदस्य हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में सभी दावों का निपटान निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जा रहा है। क्षेत्रीय कार्यालय में स्थापित संवेदना सेल एक महत्वपूर्ण पहल है। यह सेल मृत्यु दावों के त्वरित, संवेदनशील और त्रुटिरहित निपटान के लिए बनाया गया है। यह ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई योजनाओं के तहत आने वाले मामलों को एकल संपर्क बिंदु के रूप में संभालता है, जिससे लाभार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होती। इस व्यवस्था को अब पूरे जोन में लागू करने की तैयारी है।
-
रोजगार सृजन योजना पर जोर
मेहरा ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन आधारित योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इसका उद्देश्य रोजगार के अवसर बढ़ाना और युवाओं की रोजगार क्षमता में सुधार करना है। बताया कि करीब 99,446 करोड़ के परिव्यय से अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित होने का अनुमान है, जिनमें लगभग 1.92 करोड़ युवा पहली बार औपचारिक कार्यबल में शामिल होंगे। यह योजना एक अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 तक लागू रहेगी।
आंशिक निकासी नियम हुए आसान
ईपीएफओ ने आंशिक निकासी के नियमों को सरल किया है। अब 13 जटिल प्रावधानों को तीन श्रेणियों बीमारी, शिक्षा और विवाह में बांटा गया है। शिक्षा के लिए 10 बार और विवाह के लिए पांच बार निकासी की अनुमति दी गई है। जबकि इससे पहले शिक्षा और विवाह के लिए तीन बार आंशिक निकासी की अनुमति थी। इसके अलावा खाते में न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने के लिए 25 फीसदी अंशदान सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है।
अब वेल्हम बॉयज स्कूल भी ईडीएलआई में
अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त अजय के मेहरा ने वेल्हम बॉयज स्कूल से जुड़े एम्प्लॉई डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (ईडीएलआई) के लंबित मामले का निपटान कर दिया है। इस मौके पर प्राचार्य संगीता कैन को आदेश सौंपा गया। इस योजना के तहत नौकरी के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को सात लाख रुपये तक जीवन बीमा (लाइफ इंश्योरेंस) मिलता है।