चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के यात्रा पड़ावों पर भी यात्री सुविधाओं का अभाव है। यहां 18 किलोमीटर पैदल रास्ते पर मात्र दो स्थानों पर ही पीने के पानी की व्यवस्था है। स्वास्थ्य सुविधा की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
18 मई को रुद्रनाथ के कपाट खुल गए हैं। यहां तीर्थयात्रियों के पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। रुद्रनाथ मंदिर और पैदल रास्ता सेंचुरी एरिया में है, जो केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत है। इसके चलते यहां पैदल रास्ता, पेयजल सहित अन्य सभी यात्री सुविधाओं का जिम्मा वन विभाग के पास है।
लेकिन वन विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि यात्रा का पैदल मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। मंदिर परिसर में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। यात्रा मार्ग पर चिकित्सा सुविधा का भी अभाव है।
इससे यात्रा मार्ग पर बीमार होने की स्थिति में तीर्थयात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वर्ष 2016 में तीर्थयात्रा के दौरान यात्रा मार्ग पर एक तीर्थयात्री का स्वास्थ्य बिगड़ जाने पर शासन के दखल के बाद रेस्क्यू कर तीर्थयात्री को जिला चिकित्सालय लाया गया था।
स्थानीय निवासी गंभीर सिंह, अशोक सेमवाल, ओम प्रकश नेगी और देवेंद्र सिंह का कहना है कि धार्मिक व पर्यटन स्थलों पर यात्री सुविधाएं होनी ही चाहिए। इधर, जिलाधिकारी आशीष जोशी का कहना है कि रुद्रनाथ यात्रा मार्ग पर यात्री सुविधाएं जुटाने के लिए वन विभाग के अधिकारियों से वार्ता की जाएगी।