महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था हो
रचिता, अराधना, दीपा, कृष्णा आदि ने बताया कि सार्वजनिक शौचालय का संचालन पुरुष ही करते हैं। पुरुषों की भीड़ के बीच शौचालय का प्रयोग करने में संकोच होता है। रश्मि, सृष्टि, दीप्ती ने बताया कि रात को बस से मुख्य बाजार में उतरने पर शौचालय का प्रयोग करने के लिए बड़ी हिम्मत जुटानी पड़ती है। कई बार तो शौचालय बंद मिलते हैं तो बड़ी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि चाहे शुल्क रखा जाए पर महिलाओं के शौचालय की अलग व्यवस्था होनी चाहिए।
बड़ी संख्या में बाजार में आती हैं महिलाएं
जौनसार बावर और सीमांत हिमाचल क्षेत्रों का मुख्य बाजार विकासनगर है। यहां रोजाना हजारों की संख्या में खरीदारी और अन्य कार्यों के लिए ग्रामीण आते हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं व युवतियां भी शामिल रहती है। शौचालय के अभाव में महिलाओं को परेशानी होती है। जो हैं, वहां हालात ऐसी होती है कि महिलाएं सहज महसूस नहीं करतीं।
इनका कहना है
सार्वजनिक शौचालय का प्रयोग करते हुए सहज महसूस नहीं होता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल पारित कर समान अधिकार देने की बात कही जा रही है। महिलाओं को प्रत्येक नागरिक सुविधा में 50 फीसदी का अधिकार मिलना चाहिए। अगर दो सार्वजनिक शौचालय हैं तो महिलाओं के लिए भी दो पिंक शौचालय बनाए जाए। - लक्ष्मी वर्मा, छात्र संघ अध्यक्ष, वीर शहीद केसरी चंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय
सार्वजनिक शौचालयों में गंदगी बहुत होती है। ऐसे में स्वास्थ्य का विषय रहता है। खासकर ग्रामीण महिलाएं सार्वजनिक शौचालयों का प्रयोग करने में घबराती हैं। सार्वजनिक शौचालय में महिलाओं की सुरक्षा का विषय भी रहता है। महिलाओं के लिए अलग से शौचालय बनाए जाने चाहिए। - पूजा गौड़, सामाजिक कार्यकर्ता
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मैं स्वयं महिलाओं की इस परेशानी को महसूस करती हूं। विकासनगर में सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं है। पहले बड़ी मुश्किल से दो स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करवाया गया था। भूमि को खोजने का प्रयास किया जाएगा, जगह मिल जाती है तो पिंक शौचालय के निर्माण में कोई समस्या नहीं है। - शांति जुवांठा, अध्यक्ष, नगरपालिका, विकासनगर