एक ओर गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत करोड़ों की लागत से आधुनिक घाटों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही गंगा स्वच्छता संकल्प दिवस भी मनाया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर गंदे नालों और कूड़ा-कचरे का नदी में गिरना जारी है। बारिश होते ही अलकनंदा नदी में टनों गंदगी समा जाती है।
अलकनंदा घाटी में स्थित श्रीनगर, कीर्तिनगर, श्रीकोट, देवप्रयाग समेत कई छोटे-बड़े बाजारों की गंदगी अलकनंदा में गिरती है। सरकारी और निजी अस्पतालों से निकलने वाली गंदगी भी घरों से निकलने वाले नालों में मिल रही है।
श्रीनगर में हनुमान मंदिर के पीछे, अलकेश्वर घाट के समीप, भक्तियाना, श्रीकोट, स्वीत में प्लास्टिक-पॉलीथिन कचरे सहित अन्य गंदगी बरसाती नालों और नदी के समीप डंप की जा रही है। श्रीनगर में नगर पालिका का ट्रंचिंग ग्रांउड नहीं है। पूरे शहर की गंदगी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के साथ ही डंप किया जा रहा है। यह स्थान बिल्कुल अलकनंदा नदी तट से सटा हुआ है।
यहां से गंदगी अलकनंदा नदी में गिरती रहती है। शहर में हनुमान मंदिर के समीप पार्क से नदी में गंदगी उड़ेली जा रही है। यही स्थिति श्रीकोट की भी है। यहां लोग गदेरों में गंदगी फेंक रहे हैं, जो बारिश होने पर अलकनंदा नदी में बह जाती है।
श्रीनगर शहर के गंदे नाले होंगे टेप
गंगा में गिर रहे नाले
नमामि गंगे परियोजना के तहत श्रीनगर शहर के 17 नालों को अलकनंदा नदी में गिरने से रोका जाएगा। इन नालों को टेप कर सीटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) में लाया जाएगा। केंद्र सरकार ने पूरी योजना के निर्माण और 15 सालों तक संचालन और अनुरक्षण के लिए 22 करोड़ रुपये दिए हैं। 16 मई को इसके टेंडर खुल जाएंगे। श्रीनगर शहर के आधे हिस्से में वर्षों पूर्व सीवेज लाइन बिछाई गई। इसका एसटीपी अलकेश्वर घाट के समीप बनाया गया है।
दिक्कत यह है कि इसमें शहर के बहुत कम हिस्से के नालों और घरों की गंदगी का ट्रीटमेंट हो पाता है। शहर में 17 गंदे नाले बहते हैं। इसमें से सिर्फ 7 ही टेप हो पाए थे। इनका पानी भी पूरी तरह से एसटीपी में नहीं जा पाता। इसे देखते हुए पिछले तीन सालों से पेयजल निगम की गंगा अनुरक्षण इकाई सीवेज प्रोजेक्ट का प्रपोजल भेज रही थी। लेकिन इसको स्वीकृति नहीं मिल पाई। प्रदेश में सरकार बदलते ही केंद्र से 23 मार्च को श्रीनगर शहर के सभी 17 नालों के टेप करने के लिए 22 करोड़ रुपये मिल गए।
योजना के तहत गंदे नालों का दो स्थानों पर ट्रीटमेंट होगा। इसके लिए एक अन्य एसटीपी भक्तियाना में बनाया जाएगा। इसमें शहर के नालों को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया गया है। पहला भाग है घसिया महादेव से जीआईसी मार्ग तक। इस क्षेत्र और बीच बाजार के क्षेत्र के नालों को पूर्व निर्मित एसटीपी में ले जाया जाएगा। घसिया महादेव में पंपिंग स्टेशन का निर्माण किया जाएगा, जबकि अपर और लोअर भक्तियाना क्षेत्र के नालों को टेप कर यहीं निर्मित एसटीपी में ट्रीटमेंट किया जाएगा।
यह नाले होंगे टेप
गैस गोदाम, भक्तियाना नाला, एसएसबी नाला, केदारघाट नाला, प्रगति विहार नाला, जल कॉलोनी नाला, सिंचाई कॉलोनी नाला, घसिया महादेव मंदिर नाला, डैम कॉलोनी नाला, हनुमान मंदिर नाला। इसके अलावा पहले से टेप किए गए नालों में कोठड़, नया बस अड्डा, कॉन्वेंट स्कूल, केशवराय मठ, पुलिस स्टेशन, वाल्मीकि मंदिर और तिवारी मुहल्ले के नालों की मरम्मत का कार्य भी कराया जाएगा।