- तकनीक व डेटा विश्लेषण के जरिये शिक्षा प्रणाली में हो रहा व्यापक सुधार
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा, विद्या समीक्षा केंद्र प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में नवाचार, पारदर्शिता और डिजिटल निगरानी का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इस अभिनव पहल के माध्यम से छात्रों की अधिगम प्रगति, शिक्षकों के प्रशिक्षण एवं विभागीय योजनाओं की निगरानी को डेटा-आधारित किया गया है, जिससे शिक्षण गुणवत्ता, उपस्थिति, प्रशिक्षण एवं संसाधन प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है।
शिक्षा मंत्री के मुताबिक नई शिक्षा नीति–2020 के प्रावधानों के तहत विद्या समीक्षा केंद्र की स्थापना की गई है। इस केंद्र के माध्यम से प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं परिणामोन्मुख बनाया जा रहा है। केंद्र के माध्यम से छात्रों की साप्ताहिक अधिगम प्रगति की सतत निगरानी की जा रही है। इसके लिए सक्षम कार्यक्रम के तहत विषयवार क्विज एवं उपचारात्मक शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं ‘मेरी उपस्थिति’ चैटबॉट के माध्यम से विद्यार्थियों की रीयल-टाइम उपस्थिति दर्ज की जा रही है। इसके जरिए लगातार अनुपस्थित छात्रों की पहचान कर समय पर हस्तक्षेप किया जा रहा है, जिससे ड्रॉपआउट दर में कमी लाने में मदद मिल रही है शिक्षकों के लिए ‘शिक्षक सहायक’ चैटबॉट उपयोगी सिद्ध हो रहा है, जिसके माध्यम से पाठ योजनाएं, वर्कशीट और शिक्षण वीडियो उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही ई-सृजन प्लेटफार्म पर शिक्षकों को तकनीकी एवं विषयगत प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। अब तक 92 प्रतिशत शिक्षकों ने प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। जो राज्य में क्षमता निर्माण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा अभिभावकों को विभागीय योजनाओं की जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विद्या समीक्षा केंद्र के तहत ‘जिज्ञासा’ चैटबॉट शुरु किया गया है।
विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए भी नई पहल की गई है। इसके तहत फरवरी 2026 से ग्रेड चार से नौ के लिए पहल नैदानिक मूल्यांकन ग्रेड एक एवं दो के लिए निपुण अंतिम मूल्यांकन में ओसीआर तकनीक के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग की जाएगी और शिक्षक ऑनलाइन मूल्यांकन कर सकेंगे, जिससे समय की बचत होगी और दो से तीन दिन के भीतर मूल्यांकन रिपोर्ट उपलब्ध हो सकेगी।