छावनी बाजार व्यापार मंडल के अध्यक्ष केशर सिंह चौहान के नेतृत्व में शनिवार को व्यापारियों ने एसडीएम के माध्यम से केंद्रीय रक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में चकराता के सिविल क्षेत्र को छावनी परिषद से अलग कर नगर निकाय बनाने की मांग की है। कहा कि ब्रिटिश कालीन छावनी अधिनियम के तहत चकराता में सिविल क्षेत्र भी छावनी परिषद के अधिकार क्षेत्र में है। कहा कि छावनी परिषद के नियम कानून के चलते व्यापारियों और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
व्यापार मंडल के अध्यक्ष केशर सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान में केंद्र सरकार की ओर से छावनी परिषदों के तहत आने वाले सिविल क्षेत्र को नगर निकाय में विलय किया जा रहा है। लेकिन, चकराता छावनी को इससे अलग रखा जा रहा है। कहा कि पिछले कई दशकों से छावनी परिषद और उसके अधिनियम के तहत स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि चकराता में प्रदेश की सबसे बड़ी जनजाति जौनसारी समुदाय के लोग रहते हैं। चकराता कैंट संपूर्ण जौनसार बावर का केंद्र बिंदु है। कहा कि इसके अलावा चकराता में खंड विकास अधिकारी कार्यालय और तहसील सहित एक दर्जन से ज्यादा मुख्य कार्यालय भी स्थित हैं। चकराता पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहा है। लोग देश भर से यहां बड़ी संख्या में आते है। कहा कि छावनी परिषद के नियमों के चलते लोगों को अपने मकान और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के नव निर्माण, पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्य करने तक की अनुमति आसानी से नहीं मिल पाती है। छावनी परिषद क्षेत्र होने के कारण यहां पर केंद्र सरकार और राज्य सरकार की अधिकांश योजनाओं का लाभ छावनी के नागरिकों को नहीं मिल पाता है।
उन्होंने कहा कि देहरादून के तीन कैंट को स्थानीय निकाय में शामिल करने की प्रक्रिया गतिमान है, लेकिन चकराता छावनी को इससे अलग रखा गया है। उन्होेंने रक्षा मंत्री को प्रेषित ज्ञापन में चकराता कैंट के सिविल क्षेत्र को भी किसी नगर निकाय में विलय करने या अलग से निकाय का गठन किए जाने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने वालों में व्यापार मंडल के सचिव अमित अरोड़ा, पूर्व अध्यक्ष संजय जैन, छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष चंदन रावत, नैन सिंह राणा, पूर्व सभासद कमल रावत, सचिव प्रदीप जोशी आदि उपस्थित रहे।