मौसम में बदलाव के साथ गर्मी के सीजन की शुरुआत हो चुकी है। तापमान में बढ़ोतरी से अब शरीर में पानी की मांग बढ़ने लगी है। ऐसे समय में शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी की जरूरत होती है। खानपान में भी बदलाव करना पड़ता है। कम पानी पीने से डिहाइड्रेशन हो सकता है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहने पर कई बीमारियां हो सकती हैं।
मार्च के पहले सप्ताह में दिन का अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। शरीर का 60 फीसदी भाग पानी होता है। गर्मी बढ़ने के साथ शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी की जरूरत होती है। उपजिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय सिंह बताते हैं कि सर्दियों में प्यास कम लगती है। अब गर्मी शुरू हो गई है। इस दौरान पानी अधिक पीना चाहिए।
बताया कि शरीर में पानी की कमी से डिहाइड्रेशन की स्थिति पैदा हो जाती है। सूखी त्वचा, फटे होंठ डिहाइड्रेशन के पहले संकेत होते हैं। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक शरीर के डिहाइड्रेट रहने के कारण उल्टी, चक्कर आना, ब्लड प्रेशर का कम होना, कमजोरी, कब्ज की शिकायत होने लगती है। अगर लंबे समय तक डिहाइड्रेशन की स्थिति बनी रही तो इससे डायरिया और किडनी को नुकसान पहुंचाने जैसी समस्या भी हो सकती है।
डॉ. विजय सिंह ने कहा कि डिहाइड्रेशन के संकेत का पहचान कर हम उससे होने वाली परेशानी से बच सकते हैं। उन्होंने बताया कि एक वयस्क पुरुष के शरीर को दिन में कम से कम तीन लीटर पानी की जरूरत होती है। वहीं, व्यस्क महिलाओं को दिन में कम से कम दो लीटर पानी पीना जरूरी है।
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गर्भवती और धात्री को अधिक पानी की जरूरत
डॉ. विजय सिंह ने बताया कि गर्भवती और धात्री महिलाओं को सामान्य व्यस्त महिलाओं से अधिक पानी पीने की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि इन महिलाओं को दिन में कम से कम ढाई से तीन लीटर पानी पीना चाहिए। इससे माता और शिशु दोनों हाइड्रेट रहते हैं।