देवभूमि को ‘स्पेशल स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन’ के तौर पर विकसित किए जाने की मांग एक फिर जोर पकड़ने लगी है। इंडियन सोसाइटी फार ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट (आईएसटीडी) की ओर से ‘स्पिरिचुअलिटी एंड हैप्पिनेस एट वर्कप्लेस’ पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में विशेषज्ञों ने इस मांग को पुरजोर तरीके से उठाया। विशेषज्ञों ने कहा कि देश में नामी कंपनियों को कम्यूनिटी सोशल रेस्पांसबिलिटी (सीएसआर) की तर्ज पर हैप्पिनेस सोशल रेस्पांसबिलिटी (एचएसआर) प्रोग्राम संचालित करने चाहिए ताकि कर्मचारियों को खुश रखा जा सके। कहा कि अध्यात्म से जुड़कर ही खुशियां हासिल की जा सकती है।
सेमिनार के मुख्य अतिथि व भारत में फिनलैंड के राजदूत एरिक एफ हॉलस्ट्राम ने कहा कि भारत दुनिया में उन चुनिंदा देशों में से एक है। यहां के लोग कार्य के प्रति बहुत समर्पित हैं। कहा कि फिनलैंड को दुनिया का सबसे खुशहाल देश का दर्जा प्राप्त है। इसके लिए उनके देश की सरकार ने चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन समेत कई क्षेत्रों में अन्य देशों की तुलना में बेहतर काम किया है। भौतिकवाद के इस दौर में खुशियां लोगों की जिंदगी से दूर हो रही हैं। ऐसे में हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि हम सब एक दूसरे को खुशियां साझा करें।
विशिष्ट अतिथि साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि खुशियां पैसों से खरीदने की चीज नहीं है। यह मन की एक दशा है। एक सर्वे का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने दुनिया के 10 सफल लोगों से पूछा कि क्या वे अपनी जिंदगी से खुश है तो ज्यादातर ने जवाब नहीं में दिया। उन्होंने कहा कि एक ग्रह, एक मानवता के जरिए ही दुनिया में खुशियां लाई जा सकती हैं। कम्यूनिटी सोशल रेस्पांसिबिलिटी की जगह हैप्पिनेस सोशल रेस्पांसिबिलिटी पर ज्यादा फोकस करना होगा।
वक्ता वीके वर्मा ने कहा कि संयुक्त परिवारों के विघटन से खुशियों में कमी आई है। दुनिया में नामी कंपनियों ने अधिकारियों व कर्मचारियों को खुश रखने के लिए तमाम कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं।
आईएसटीडी देहरादून चैप्टर के अध्यक्ष डॉॅ. अविनाश चंद्र जोशी ने कहा कि जहां एक तरफ भारत तेजी से आर्थिक तरक्की कर रहा हैं, वही हैपिनेस इंडेक्स में भारत 156 देशों में 140 पायदान पर है, जो चिंता का विषय है। कहा कि अध्यात्म से जुड़कर ही खुशियां हासिल की जा सकती है।
वक्ता अखिलेश अर्गल ने कहा कि देश में हैप्पिनेस इंडेक्स पर काम करने की जरूरत है। वैज्ञानिक शोध में यह बात सामने आयी है कि खुशहाल कर्मचारी सामान्य की तुलना में 12 फीसदी अधिक काम करता है। साथ ही अप्रसन्न कर्मचारी साल मेें 15 दिन बहाने बनाकर अवकाश लेता है जिसका असर कंपनी की वृद्धि पर पड़ता है। अप्रसन्न कर्मचारियोें को कई बीमारियां भी घेरने की बात वैज्ञानिक शोधों में सामने आई हैं। खुशहाल कर्मचारियों की क्षमता में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है। सेमिनार में वाई मनोहर येलिशेट्टी, विजय गोयल, डीवी शास्त्री, डॉ. वीके जैन, राजीव भदौरिया, डॉ. विनयशील गौतम समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
इससे पूर्व फिनलैड के राजदूत एरिक एफ हॉल्स्ट्राम, साध्वी भगवती सरस्वती, डॉ. अविनाश जोशी, ग्रॉफिक एरा विवि के कुलपति डॉ. संजय जसोला, आईएसटीडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नटराज रे ने संयुक्त रूप से सेमिनार का उद्घाटन किया।
सेमिनार में नहीं शामिल हो सके मुख्यमंत्री
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था, लेकिन सरकारी कार्य में व्यस्तता के चलते वे सेमिनार में शामिल नहीं हो सके। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की वजह से वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए।
खुश रहने के टिप्स
-- दूसरों को खुशियां देने की प्रवृत्ति विकसित करेें।
-- हमेशा दूसरों की मदद करने की भावना रखें।
-- आदर्शों के साथ सामान्य जीवन जीने की कोशिश करें।
-- आत्ममंथन की प्रवृत्ति विकसित करें।
-- परिजनों के साथ ही दोस्तों से छोटी बड़ी खुशियां साझा करें।
-- दूसरों के अच्छे कामों की भी दिल खोलकर तारीफ करें।
-- खुद की गल्तियों को स्वीकार करना सीखें।
-- 24 घंटे के भीतर 15 मिनट जरूर मौन रहें।
-- हमेशा सकारात्मक सोचें।
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