औद्योगिक क्षेत्र सेलाकुई की आबादी एक लाख के पार पहुंच गई है। दून पावंटा राष्ट्रीय मार्ग के करीब होने के कारण यहां आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। पीएचसी में मरीजों और घायलों को केवल प्राथमिक उपचार ही मिल पाता है। लोगों को झोलाछाप और निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है। यहां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उच्चीकरण की मांग लगातार उठ रही है। वर्ष 1980 में कांजी हाउस में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शुरू किया गया था। वर्ष 2005 में पीएचसी को अपना भवन नसीब हुआ। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। जरूरत के अनुसार चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार नहीं हुआ है। पीएचसी में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों और घायलों को सीधा देहरादून के हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। वहीं, उपचार के लिए अस्पताल केवल दो चिकित्सक और चार बेड हैं। लोगों की मांग है कि आबादी के अनुसार पीएचसी का उच्चीकरण कर सीएचसी में परिवर्तित किया जाए।
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Iप्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जिस समय खुला था उस समय क्षेत्र की जनसंख्या 10 हजार थी। वर्तमान में आबादी एक लाख से भी अधिक है। पीएचसी के उच्चीकरण की मांग लंबे समय से चल रही है। कई बार विभाग और शासन से पत्राचार भी किया गया, लेकिन केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं।
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Iभगत सिंह राठौड़, पूर्व प्रधान, सेंट्रल होप टाउनI
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Iसेलाकुई की मौजूदा आबादी को देखते हुए यहां 50 से 100 बेड के बड़े अस्पताल की जरूरत है। अस्पताल के उच्चीकरण के लिए स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा गया है। अगर सीएचसी खुल जाता है तो जनता को इसा बड़ा लाभ मिलेगा।
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Iवीरता गुरुंग, जिला उपाध्यक्ष, ओबीसी मोर्चा, भाजपाI
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Iप्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इमरजेंसी और गंभीर बीमारियों के उपचार की सुविधा नहीं है। निजी क्लीनिक और अस्पताल का उपचार महंगा है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों और घायलों को झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है। पीएचसी का उच्चीकरण अत्यंत जरूरी है।
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Iनरगिस कश्यप, सामाजिक कार्यकर्त्ताI