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Dehradun News: अंतरराष्ट्रीय पटल पर गूंजा प्रदेश के वैज्ञानिकों का नाम

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हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विवि के भौतिकी विभाग की न्यूक्लियर रिसर्च लैबोरेटरी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एटॉमिक रेडिएशन के प्रभावों पर गठित वैज्ञानिक समिति की प्रतिष्ठित वर्ष 2024 की वैश्विक रिपोर्ट में विवि के सात सात शोधपत्रों को शामिल किया गया है। रिपोर्ट विश्वभर में रेडिएशन सुरक्षा मानकों व नीतियों के निर्माण का प्रमुख आधार मानी जाती हैं। लंबे समय तक इन रिपोर्टों में अमेरिकी व यूरोपीय देशों के आंकड़ों का प्रभुत्व रहा, जबकि एशियाई देशों का प्रतिनिधित्व सीमित था। इसी असंतुलन को दूर करने के उद्देश्य से वर्ष 2009 में भारत, जापान, चीन, कोरिया व थाईलैंड के वैज्ञानिकों का एक सहयोगी नेटवर्क गठित किया गया। भारत में उच्च पृष्ठभूमि रेडिएशन क्षेत्रों पर हुए इस महत्वपूर्ण शोध कार्य का नेतृत्व विवि के भौतिकी विभाग के विभाग अध्यक्ष वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. आरसी रमोला ने किया। विवि की न्यूक्लियर रिसर्च लैबोरेटरी पिछले लगभग तीन दशकों से पर्यावरणीय रेडियोधर्मिता, विशेष रूप से रेडॉन, थोरॉन व उनके क्षय उत्पादों पर निरंतर शोध कर रही है। प्रयोगशाला ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड, इंटर यूनिवर्सिटी एक्सेलेरेटर सेंटर और जापान के हिरोसाकी व टोक्यो मेट्रोपॉलिटन विवि जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ महत्वपूर्ण अनुसंधान सहयोग स्थापित किए हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में विवि के सात शोधपत्रों का शामिल होना न केवल विवि बल्कि पूरे उत्तराखंड और भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए गर्व का विषय है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि में योगदान देने वाले प्रमुख वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं में प्रो. आरसी रमोला, प्रो. एए बौड़ाई, डॉ. गणेश प्रसाद, स्व. डॉ. जीएस गुसाईं, भागवत रौतेला, डॉ. मुकेश प्रसाद, डॉ. मुकेश रावत, अनूप डंगवाल, डॉ. प्रीति पंत, डॉ. पूजा पंवार, डॉ. अभिषेक जोशी, प्रो. कुलदीप सिंह और डॉ. पूनम सेमवाल शामिल हैं।
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