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Iकोई शौचालय न होने के कारण आसपास के बस्तीवासी और व्यापारी खुले में शौच को मजबूरI
शौचालय के लिए जमीन का रोना रोने वाला नगर निगम पूर्व में बने शौचालयों की देखरेख तक नहीं कर पा रहा है। कई शौचालय जर्जर हालत में पड़े हुए हैं और उन पर ताले लटके हुए हैं। गोविंदगढ़ में वर्ष 2013 में पुरुष व महिलाओं के लिए बना शौचालय इसका उदाहरण है। देखरेख न होने के कारण यह शौचालय आज जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। इससे आसपास के लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
गोविंदगढ़ में बने इस शौचालय का निर्माण वर्ष 2013 में हुआ था। शौचालय का निर्माण पर्यटन विभाग की ओर से वित्त पोषित जिला योजना के तहत किया गया था। 17 मार्च 2013 में तत्कालीन कैंट विधानसभा विधायक स्व. हरबंश सिंह कपूर ने तत्कालीन मेयर विनोद चमोली की अध्यक्षता में इसका लोकार्पण किया गया था। इसमें ऊपर महिलाओं के लिए जबकि नीचे पुरुषों के लिए शौच के साथ ही नहाने की व्यवस्था की गई थी। आसपास के मलिन बस्ती की महिलाएं और स्थानीय व्यापारी इसका प्रयोग करते थे। कुछ साल चलाने के बाद नगर निगम की ओर से ताले लगा दिए गए। आज आलम यह है लाखों रुपये से बना यह शौचालय जीर्ण-शीर्ण हो चुका है।
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Iगोविंदगढ़ में दस साल पहले शौचालय बनाया गया था। इससे बस्तीवासियों को काफी सहूलियत होती थी। खासकर महिलाओं को खुले में शौच नहीं करना पड़ता था, लेकिन बामुश्किल एक-दो साल चलने के बाद उसे बंद कर दिया। अब महिलाओं को खुले में शौच करने को मजबूर होना पड़ता है।
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Iभीमबहादुर, स्थानीय निवासी
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Iजब शौचालय था तो पांच रुपये लिए जाते थे। इससे महिलाओं काफी सहूलियत मिलती थी, लेकिन अब महिलाओं के सामने बड़ी समस्या हो खड़ी हो गई है। उन्हें खुले में शौच के साथ ही खुले में नहाना पड़ता है।
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Iसुमित देवी, स्थानीय निवासी
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Iशौचालय होने से आसपास के लोगों को काफी सुविधा मिलती थी। खासकर गरीब लोग और बस्तीवासी इसका लाभ उठाते थे, लेकिन अब उनके सामने समस्या खड़ी हो गई है। वह मजबूरन खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
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Iजुगल किशोर स्थानीय निवासीI