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Iनिगम अफसर बोले - एक-दो साल में दिखेगा नसबंदी का असरI
नगर निगम पिछले आठ साल से कुत्तों की नसबंदी के लिए लगातार अभियान चल रहा है। नगर निगम के आंकड़े बताते हैं, इस दौरान 44 हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। इसके बाद भी सड़कों पर आवारा कुत्तों के झुंड लोगों के लिए मुसीबत बने हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि सड़कों पर पिल्लों की संख्या काफी कम है। एक-दो साल में नसबंदी का असर देखने का मिलेगा।
दून की सड़कों पर आवारा कुत्तों का आतंक है। कुत्ते आने-जाने वालों पर हमला कर जख्मी रहे हैं। दून अस्पताल में आने वाले डॉग बाइट के मामले इसकी तस्दीक कर रहे हैं। अस्पताल में रोज 40 से 50 लोग डॉग बाइट के आ रहे हैं। यह स्थिति तब है जब निगम लगातार आठ साल से कुत्तों की नसबंदी का अभियान चला रहा है। निगम की मानें को अब तक करीब 44 हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। अभी भी अभियान चलाया जा रहा है। हैरत की बात यह है कि 44 हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी होने के बाद भी कुत्तों के झुंड सड़कों पर घूमते नजर आ रहे हैं।
Iपालतू कुत्तों के काटने की घटनाएं अधिकI
दून में लोगों ने खतरनाक नस्ल के कुत्ते पाले हैं। इसमें पिटबुल, बॉक्सर, रॉटबिलर, डाबरमैन जैसे नस्ल हैं। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक दून में देशी-विदेशी प्रजाति के चार हजार से अधिक कुत्ते हैं। दून अस्पताल में आने वाले अधिकतर डॉग बाइट के मामले पालतू कुत्तों के आते हैं। नगर निगम के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीसी तिवारी ने बताया कि कुत्तों के काटने का प्रमुख कारण ठंडे इलाकों की नस्ल को गर्म इलाकों में पाला जाना है। इससे उसने व्यवहार में परिवर्तन होता है। जिससे वह खूंखार हो जाते हैं।