दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन आज भी हमारे देश के कई तबके, टॉयलेट जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। स्वीच्छ भारत मिशन की बात करें तो यह चौथे साल में प्रवेश कर गया है, लेकिन अब भी खुले में शौच एक बड़ी समस्याा है।
इस वजह से कई बीमारियां भी पैदा हो रही हैं और महिलाओं की सुरक्षा की भी चिंता है। वे या तो सुबह सूरज निकलने से पहले खुले में शौच के लिए जाती हैं या रात को सूरज डूबने के बाद। ऐसे कई केस सामने आए हैं, जब खुले में शौच के लिए समूह बनाकर जाने वाली महिलाएं शोषण का शिकार हो जाती हैं।
उत्त राखंड के पांच जिले- देहरादून, हल्द्वा नी, रुद्रपुर, हरिद्वार और रुड़की में सैकड़ों ऐसे ही वंचित लोगों की मदद के लिए
दि हंस फाउंडेशन ने हाथ बढ़ाया है।
समाज सेवा के लिए पूरे देश में कार्य कर रहे दि हंस फाउंडेशन ने स्थाजनीय निकायों की मदद से वंचित लोगों की सूची प्राप्तल की और इन पांच जिलों में करीब 3721 टॉयलेट बनवाए हैं।
दि हंस फाउंडेशन ने बनवाए टॉयलेट
दि हंस फाउंडेशन ने दो अहम बातों को ध्या न में रखकर टायलेट का निर्माण कार्य कराया। पहला- खुले में शौच से मुक्ति और दूसरी- स्थाननीय लोगों को इस बात के प्रति जागरूक किया जाए कि खुले में शौच स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।
टॉयलेट निर्माण के इस कार्य में दि हंस फाउंडेशन के साथ 7 अन्य संस्था नाओं ने भी सहयोग दिया। इनके नाम हैं- आदर्श युवा समिति, ग्रामीण तकनीकी समिति, ग्राविस हैबीटैट फॉर ह्यूमैनिटी इंडिया, भारतीय ग्रामोथान संस्था्, वरदान और लीडर्स।
दि हंस फाउंडेशन ने जो टॉयलेट बनवाए हैं, वे सभी लाभार्थियों को उपयोग के लिए सौंप दिए गए हैं। उत्तॉराखंड के पांचों जिलों में जिन स्थामनों पर टॉयलेट निर्माण कराया गया है, उस एरिया को खुले में शौच मुक्ता घोषित कर दिया गया है।