टिहरी लोकसभा क्षेत्र के चुनावी नतीजों में कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए पहाड़ पर चुनौतियां कम नहीं रहीं, लेकिन सबसे चौंकाने वाली जंग चकराता विधानसभा की रही। चकराता हमेशा से ही कांग्रेस का अभेद्य किला रहा। इसे वर्ष 2004 से 2019 तक हर दांव आजमाने के बाद भाजपा भी नहीं जीत सकी, इसे बॉबी पंवार ने कांग्रेस से छीन लिया।
टिहरी लोकसभा क्षेत्र में भाजपा ने बेशक जीत का सेहरा पहना हो, लेकिन पहाड़ी विधानसभाओं पर भाजपा और कांग्रेस दोनों को दुश्वारियों से जूझना पड़ा। कांग्रेस का वोट प्रतिशत बंटने के कारण तेजी से कम हुआ तो भाजपा भी सभी प्रयोगों के बाद वोट प्रतिशत नहीं बढ़ा सकी। चकराता में कांग्रेस के मतदाताओं ने बॉबी को बेहतर विकल्प के तौर पर स्वीकार किया। बॉबी को यहां 48 फीसदी से अधिक मत मिले, जबकि कांग्रेस के मतों में 65 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। कांग्रेस का वोट बॉबी पंवार के पाले में जाने के कारण पहली बार भाजपा ने 26 फीसदी वोट पाकर कांग्रेस को शिकस्त देने में कामयाबी हासिल की।
वहीं, पुरोला व यमुनोत्री सीट पर भाजपा ने जीत के लिए हर कोशिश की। कांग्रेस के पूर्व विधायक मालचंद को सदस्यता दिलाई, इसके बाद भी भाजपा का वोट प्रतिशत 40 से घटकर 8 फीसदी पर पहुंच गया। यमुनोत्री सीट का भी यही हाल रहा। पिछली बार यहां 27 फीसदी वोट भाजपा को मिले थे, जो इस बार सात प्रतिशत पर सिमट गए।
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पहाड़ पर कांग्रेस को पिछली बार सबसे कम नौ हजार, इस बार सर्वाधिक 7500 मत
पहाड़ी विधानसभा क्षेत्र पुरोला, यमुनोत्री, गंगोत्री, घनसाली, प्रतापनगर, टिहरी, धनोल्टी समेत चकराता में कांग्रेस जिस तरह मात खाई वह सामान्य नहीं है। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रीतम सिंह को इन सभी क्षेत्रों में खासे वोट मिले थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। पिछली बार कांग्रेस को पहाड़ पर सबसे कम नौ हजार मत मिले थे, वहीं इस बार सर्वाधिक 7538 के आंकड़े को भी कांग्रेस पार नहीं कर सकी। कांग्रेस के वोटों में यह गिरावट क्यों आई, विधानसभावार मिले मत इस तस्वीर को साफ करते हैं। दरअसल पहाड़ी क्षेत्रों में कांग्रेस का वोट इस बार बॉबी पंवार के पाले में जाता दिखा।
मैदान में मिली बढ़त भी नहीं बन सकी संजीवनी
पहाड़ पर भाजपा के वोटों में खूब गिरावट आई। विकासनगर विधानसभा की ईवीएम खुलते ही भाजपा के पक्ष में वोटों की बौछार शुरू हो गई। सहसपुर, रायपुर, राजपुर रोड, देहरादून कैंट विधानसभा तक जारी रहे इस सिलसिले ने जीत भाजपा की झोली में डाल दी। वहीं, कांग्रेस ने पहाड़ में पिछड़ना शुरू किया तो धनोल्टी तक आठ हजार मतों का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी। देहरादून में कांग्रेस को बढ़त मिलनी शुरू हुई तो मसूरी तक यह जारी रही, लेकिन पहाड़ों पर मिली शिकस्त के कारण कांग्रेस प्रत्याशी भाजपा को मात देने में कामयाब नहीं हो सका।
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टिहरी समेत पहाड़ी विधानसभाओं में घट गया भाजपा का वोट
भाजपा के लिए भी पहाड़ी विधानसभा क्षेत्र मुफीद नहीं रहे। भाजपा के वोट बैंक में कांग्रेस की तरह सेंध तो नहीं लगी, लेकिन पहाड़ पर पुरोला, यमुनोत्री, गंगोत्री, घनसाली, प्रतापनगर विधानसभा क्षेत्रों में पिछली बार की अपेक्षा कम वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी माला राज्यलक्ष्मी शाह का वोट प्रतिशत उनकी गृह विधानसभा टिहरी में भी कम हो गया।