निशा नर्सिंग होम में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में परिजनों ने अब उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल से शिकायत की है। सीएमओ स्तर पर गठित कमेटी की जांच में इलाज में लापरवाही से जुड़े साक्ष्य नहीं मिले। ऐसे में सीएमओ की ओर से एक लाख रुपये जुर्माना और शपथ पत्र लेने के बाद नर्सिंग होम खोलने की अनुमति दे दी गई है। परिजनों ने स्वास्थ्य महानिदेशक को मामले की जानकारी दी। इसके बाद मामले को उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल भेज दिया गया।
गौरतलब है कि गत दिनों निशा नर्सिंग होम में जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। इस दौरान परिजनों ने इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। परिजनों ने सीएमओ कार्यालय के बाहर धरना भी दिया था। सीएमओ ने कमेटी गठित कर मामले की जांच करवाई। जांच में इलाज के दौरान लापरवाही से जुड़ी कोई भी बात सामने नहीं आई। हालांकि नर्सिंग होम ने चिकित्सकों की तैनाती से जुड़ी जानकारी छिपाई थी। इसके लिए एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। साथ ही सभी चिकित्सकों से शपथ पत्र लिए गए। परिजनों ने इसको चुनौती देते हुए उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल में शिकायत की है। जानकारी के मुताबिक परिजनों की ओर से अभी प्रारंभिक शिकायत ही गई है। कमेटी गठित करने के लिए परिजनों को हलफनामा देना होगा।
कोट-
मामले में अभी शुरुआती शिकायत ही प्राप्त हुई है। तीमारदारों से आरोपों के आधार को स्पष्ट करने वाला हलफनामा भी मांगा गया है। इसके आधार पर चार सदस्यी कमेटी जांच करेगी। - डॉ. सुधीर कुमार पांडेय, रजिस्ट्रार उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल