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I- जिलाधिकारी ने ब्लैकलिस्टेड विभागों को अल्टीमेटम देकर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दीI
वर्ष 2023 अंतिम पड़ाव पर है लेकिन कुछ विभाग विकास योजनाओं के क्रियान्वयन का ठीक से खाता तक नहीं खोल पाए। हाल ये हैं कि लोक निर्माण विभाग, चिकित्सा और बाल विकास विभाग अपनी बी-सी-डी श्रेणियों से ऊपर नहीं जा पाए। इसी क्रम में जिलाधिकारी सोनिका व सीडीओ झरना कामठान ने विकास योजनाओं के क्रियान्वयन न करने पर ब्लैकलिस्टेड विभागों को अल्टीमेटम देकर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
पूरा साल गुजर गया और कई विभागों की सुस्ती अभी टूटी नहीं है। जिला योजना से लेकर राज्य सेक्टर, केंद्र पोषित और बाहरी सहायतित योजनाओं में विभाग तय लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। योजनाओं के कुल प्रगति की बात करें तो जिला योजना में अब तक कुल 52.28 प्रतिशत, राज्य सेक्टर में 63.38 प्रतिशत खर्च योजनाओं पर किया गया है। वहीं, सबसे अच्छा प्रदर्शन केंद्र पोषित योजनाओं में रहा है। इसमें 83.50 प्रतिशत खर्च विभागों ने किया, तो बाहरी सहायतित योजनाओं में विभाग सबसे पीछे हैं। इसमें जिले में कुल 46.81 प्रतिशत खर्च ही किया जा सका है।
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Iबी श्रेणी में दो, सी और डी श्रेणी में एक-एक विभागI
बीस सूत्रीय कार्यक्रम में सरकारी विभागों का प्रदर्शन उनका ग्रेड तय करता है। जिले में 34 विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में विभागों को ग्रेड दिया जाता है। दिसंबर के अंत तक ए श्रेणी में 30 योजनाएं पहुंच चुकी हैं, जबकि बी श्रेणी में दो, सी और डी श्रेणी में एक-एक योजना है। इसीलिए शिशु टीकाकरण में पिछड़ने के लिए चिकित्सा विभाग और पारिवारिक बॉयो गैस संयंत्र की स्थापना में मात खाने पर ग्राम्य विकास विभाग की उरेडा को रखा गया है। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में अपेक्षित प्रगति न होने पर बाल विकास विभाग को सी श्रेणी में शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में प्रगति कम होने के कारण लोक निर्माण विभाग को डी श्रेणी दी गई है।
Iकुछ पिछड़ते ही गए, कुछ आगे बढ़ गएI
योजनाओं के क्रियान्वयन में विभाग अचानक नहीं पिछड़े हैं। दिसंबर के अंत में जो विभाग पिछड़े वे दरअसल अप्रैल से ही पिछड़ते आ रहे हैं। बाल विकास विभाग को सी श्रेणी दी गई है। यह पहले डी श्रेणी में शामिल था, जुलाई 2023 ये यह सी श्रेणी में चल रहा है। लोक निर्माण विभाग अप्रैल से लगातार डी श्रेणी में शामिल है। उरेडा पहले डी श्रेणी में रहा, फिर सी में और सितंबर से बी श्रेणी में शामिल है। चिकित्सा विभाग अगस्त से ए श्रेणी में शामिल था, इसी माह यह डी श्रेणी में आया है। उद्योग, नगर विकास और ग्राम्य विकास विभाग ने बेहतर काम किया, पहले यह डी श्रेणी में शामिल थे, लेकिन अब यह ए श्रेणी में पहुंच गए हैं।
Iकागजी निर्देश नहीं, अब रोका जाएगा वेतनI
योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए विकास विभाग तेजी से काम कर रहा है। इसके बाद भी लापरवाही करने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिला योजना में 50 और राज्य तथा केंद्र की योजनाओं में 60 प्रतिशत से कम प्रगति होने पर अफसरों का वेतन रोका जाएगा। 20 सूत्रीय कार्यक्रम में बी-सी-डी श्रेणी वालों विभागों को नोटिस भेजे गए हैं। - झरना कामठान, मुख्य विकास अधिकारी, देहरादून