उत्तराखंड एक ऐसी धरोहर का गवाह बनने जा रहा है जिसकी भव्यता और इंजीनियरिंग को देखकर हर कोई दांतों तले उंगली दबा लेगा। 40 किमी लंबी विशाल टिहरी झील के ठीक ऊपर देश के इस सबसे लंबे (760 मीटर) मोटर झूला पुल को बनाने में भारत, कोरिया और चीन के इंजीनियरों का हुनर दांव पर लगा है।
प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारना कोई आसान काम नहीं है। पुल के टावर की ऊंचाई कुतुबमीनार से महज 34 फीट कम है। इतनी ऊंचाई से इस पुल को बनाने में इंजीनियरों ने अपना समूचा ज्ञान और अनुभव झोंक दिया है। ये वही डोबरा-चांठी पुल है जो खराब इंजीनियरिंग और कथित भ्रष्टाचार के लिए देशभर में बदनाम रहा।
टिहरी जनपद के प्रतापनगर क्षेत्र को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए इस परियोजना को सबसे पहले 17 अप्रैल 2006 को मंजूरी मिली। टिहरी बांध पुनर्वास निदेशालय को इसका जिम्मा सौंपा गया। पुल निर्माण के लिए करीब 89 करोड़ रुपये मंजूर हुए। फिर आठ दिसंबर 2008 को लागत बढ़ाकर 128.53 करोड़ रुपये कर दी गई। उस समय इस मोटर झूला पुल की लंबाई 532 मीटर प्रस्तावित थी।
12 जनवरी 2012 को शुरू हुआ था डिजाइन का काम
Dobra-Chanti jhula pul
उत्तराखंड एक ऐसी धरोहर का गवाह बनने जा रहा है जिसकी भव्यता और इंजीनियरिंग को देखकर हर कोई दांतों तले उंगली दबा लेगा। 40 किमी लंबी विशाल टिहरी झील के ठीक ऊपर देश के इस सबसे लंबे (760 मीटर) मोटर झूला पुल को बनाने में भारत, कोरिया और चीन के इंजीनियरों का हुनर दांव पर लगा है।
प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारना कोई आसान काम नहीं है। पुल के टावर की ऊंचाई कुतुबमीनार से महज 34 फीट कम है। इतनी ऊंचाई से इस पुल को बनाने में इंजीनियरों ने अपना समूचा ज्ञान और अनुभव झोंक दिया है। ये वही डोबरा-चांठी पुल है जो खराब इंजीनियरिंग और कथित भ्रष्टाचार के लिए देशभर में बदनाम रहा।
टिहरी जनपद के प्रतापनगर क्षेत्र को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए इस परियोजना को सबसे पहले 17 अप्रैल 2006 को मंजूरी मिली। टिहरी बांध पुनर्वास निदेशालय को इसका जिम्मा सौंपा गया। पुल निर्माण के लिए करीब 89 करोड़ रुपये मंजूर हुए। फिर आठ दिसंबर 2008 को लागत बढ़ाकर 128.53 करोड़ रुपये कर दी गई। उस समय इस मोटर झूला पुल की लंबाई 532 मीटर प्रस्तावित थी।
अगस्त 2017 तक पुल निर्माण का लक्ष्य
Dobra-Chanti jhula pul
इसी कोरियन कंपनी के तकनीशियनों की देखरेख में प्रिल और वीकेजी-ए कंपनी काम में जुट गई है। उन्हें अगस्त 2017 तक देश के इस सबसे लंबे मोटर झूला पुल का निर्माण करना है। प्रोजेक्ट के लिए लोनिवि का पूरा एक डिवीजन मोर्चे पर है। चीनी इंजीनियरों की अनुभवी टीम भी पुल निर्माण के काम में जुटी है। धीरे-धीरे पुल आकार लेने लगा है।
उप्रेती कहते हैं,‘हालात बेहद दुरूह हैं। पुल के टॉवर 200 फीट ऊंचे हैं, जो कुतुबमीनार से केवल 34 फीट ही कम है। इतनी हाइट से पुल को तारों से बुनना कोई आसान नहीं है।
मगर ये भी सच है कि जिस दिन ये पुल खड़ा हो जाएगा, उस दिन उत्तराखंड की पहचान की एक वजह इसकी भव्यता और कमाल की इंजीनियरिंग भी होगी, जिसे देखकर हर कोई दांतों तले उंगली दबा लेगा।