भाजपा नेता का आरोप हजारों की संख्या में काटे गए पेड़
चकराता वन प्रभाग की कनासर रेंज मे संरक्षित व प्रतिबंधित प्रजाति के वृक्षों के अवैध पातन का मामला वन विभाग के गले की फांस बनता चला जा रहा है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, अवैध पातन का मामला गंभीर हो रहा है।
देहरादून के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और भाजपा नेता रामशरण नौटियाल ने पिछले माह कनासर रेंज में हजारों की संख्या में पेड़ काट दिए जाने की बात करके सनसनी फैला दी थी। उन्होंने प्रदेश के वन मंत्री के सामने इस मामले को रखा तो सरकार और विभाग हरकत में आ गए। वन विभाग ने मंत्री के आदेशों पर आनन-फानन में जांच बैठाने के साथ सात पेड़ काटे जाने की पुष्टि कर दी।
इसके साथ ही कनासर रेंज के रेंजर महेंद्र सिंह गुंसाई को रेंज से हटाकर कार्यालय अटैच करने के साथ वन दरोगा आशीष चंद्रा और वन रक्षक भगत सिंह राणा को निलंबित कर दिया। दरअसल वन विभाग की तीव्र गति से हुई इस कार्रवाई ने शिकायतकर्ता से लेकर क्षेत्र के हर आदमी को चौंका दिया। पर्यावरण प्रेमी अक्षय सिंह, कल्याण चौहान का कहना है कि किसी भी शिकायत को लेकर जांच का काम त्वरित गति से न होकर विस्तृत रूप में होना चाहिए। यदि यह मामला हजारों पेड़ काटने का है तो जांच का काम बेहद सहनशीलता के साथ और बिंदुवार किया जाना चाहिए।
कीमती लकड़ी के लिए जाना जाता है कनासर का जंगल
चकराता वन प्रभाग की कनासर रेंज का जंगल 6600 हेक्टेयर में फैला हुआ है। जंगल को सुरक्षा की दृष्टि से दस बीट में बांटा गया है। कनासर रेंज का यह जंगल कीमती लकड़ी के नाम से भी जाना जाता है। जंगल में देवदार, साल, सागौन व कैल के पेड़ भारी संख्या में मौजूद हैं। यही कारण है कि यह जंगल हमेशा से ही लकड़ी तस्करों के निशाने पर रहा है।
बयान...
वन विभाग के स्तर से चल रही जांच अभी जारी है। जो भी तथ्य सामने आ रहे हैं, उनके आधार पर कार्रवाई भी साथ-साथ की जा रही है। - कल्याणी नेगी, डीएफओ चकराता।
विभागीय स्तर पर चल रही मामले की जांच हर पहलु को आधार बनाकर की जा रही है। प्रारंभिक जांच में जो स्थिति सामने आई है, उस पर कार्रवाई भी हुई है। आगे भी तथ्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की अमल में लाई जाएगी। अनूप मलिक, प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड