सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करने मानथात में जुटे सैकड़ों लोग
भेड़ पालकों के सकुशल लौटने पर मनाया जाता है जश्न
विकासखंड के बोंदूर खत अंतर्गत मानथात में नुणाई मेला धूमधाम से मनाया गया। पारंपरिक परिधानों में पहुंचे लोगों ने लोक गीतों पर नृत्य किया।
रविवार सुबह से ही बोंदूर खत के कुन्ना, म्यूंढा, लाखामंडल, लावड़ी, कांडी, गाता, च्यामा,कांडोई, भटाड़, दतरोटा, मोठी, छुल्टाड़, गोठाड़ आदि गांवों के लोग पारंपरिक परिधानों में ढोल दमाऊ के साथ मेला स्थल पर पहुंचे। लोगों ने हारुल, जैन्ता, रासो, तांदी आदि गीतों पर नृत्य किया। बौंदूर खत के सदर स्याणा और लावड़ी गांव निवासी रजनीश पंवार ने बताया कि प्रति वर्ष सावन महीने के 22 गते पर यह पर्व मनाया जाता है। जंगलों से करीब छह माह बाद भेड़ पलकों के घर वापसी पर नुणाई मेले का आयोजन किया जा रहा है।
मानथात में भेड़पालकों के स्वागत के लिए लोग जुटते थे। उनका भव्य स्वागत किया जाता था। भेड़ों को नमक खिलाया जाता था। जिस कारण इस पर्व का नाम नुणाई पड़ा। हालांकि अब क्षेत्र में भेड़ पालन विलुप्ति की कगार पर हैं, लेकिन अपनी परंपराओं का निर्वहन करने लिए प्रत्येक वर्ष लोग मानथात में एकत्र होते हैं।
उन्होंने बताया कि इस दिन प्रत्येक घर में मीठा सेरुवा (रोटी के आकर का) बनाया जाता है। जिसका आधा टुकडा नुड़ाई थात में मात्रियों यानि वनदेवियों/परियों को चढ़ाया जाता है। आधा सेरुवा भेड़ चराहों को दिया जाता है, जिसे वह प्रसाद के रूप में सबको बांटते है। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता नीरू जोशी, बचना शर्मा, सुनील नौटियाल, राजपाल रावत, सूरत सिंह, दिवान सिंह, चंडी प्रसाद नौटियाल, प्रीतम सिंह सहित सैकड़ो की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।