हरिद्वार क्षेत्र में सबसे अधिक कार्रवाई, बंद पड़ी फैक्टरियों में बन रहा ठिकाना
तीन साल पहले एसटीएफ ने रुड़की क्षेत्र की फैक्टरी पर छापा मारकर करोड़ों रुपये की दवाएं पकड़ी थीं। जांच में पता चला कि यहां से दवाओं की सप्लाई मुंबई तक हो रही थी। चौंकाने वाला खुलासा तो उस वक्त हुआ जब यह पता चला कि ये लोग इन दवाओं को कुरियर से भेजते थे। ताकि, ये टैक्स के दायरे में भी न आएं। इसी तरह से पिछले साल देहरादून में एक नामी कंपनी के नाम से दवाएं बनाई जा रही थीं। तीन लोग जब गिरफ्तार हुए तो पता चला कि इनकी एक महीने की कमाई ही 40 लाख रुपये थी।
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कुरियर से भी भेजते थे दवाएं
मानकों से कम कर्मचारी हैं निगरानी वाले विभाग में कहने को 200 मेडिकल स्टोर और 50 फार्मा कंपनियों पर एक औषधि निरीक्षक का मानक है। राज्य में छह वरिष्ठ औषधि निरीक्षक और 33 औषधि निरीक्षक के पद स्वीकृत हैं। मुख्यालय, देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में पांच-पांच, नैनीताल में तीन, पौड़ी में दो और बाकी जिलों में एक-एक औषधि निरीक्षक होना चाहिए। पर धरातल पर स्थिति अत्यंत बुरी है। ऐसे में नशीली और नकली दवा के धंधेबाजों के हौसले बुलंद हैं।I