एफआरआई में आयोजित दो दिवसीय ऑल इंडिया पुलिस साइंस कांग्रेस में पुलिस के विशेषज्ञों ने अंग्रेजों की पुलिस व्यवस्था से निकलकर इसे पूरी तरह से भारतीयकरण करने पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि हम 150 साल पुरानी अंग्रेजों की पुलिस व्यवस्था को ढो रहे हैं। आधुनिक युग में भारत को तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत होकर अपनी पुलिस को भी आज के भारत के हिसाब से बनाना होगा। विशेषज्ञों ने साइंस कांग्रेस के पहले दिन आयोजित तीन सत्रों में अपने विचार रखे। इनमें पहला सत्र 5 जी युग में पुलिस व्यवस्था, दूसरा सत्र नारकोटिक्स एक अभूतपूर्व दृष्टिकोण और तीसरा सत्र पुलिस और सीएपीएफ के बीच समन्वय पर रहा।
सत्र 1: भ्रष्टाचार विरोधी जांच में क्रांतिकारी साबित हो रही एआई
पहला सत्र 5 जी युग में पुलिस व्यवस्था पर आधारित था। इसमें उत्तर प्रदेश पुलिस के एडीजी राजा श्रीवास्तव ने कहा कि भ्रष्टाचार विरोधी जांचों में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के उपयोग से क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। आधुनिक तकनीक का उपयोग कर कम समय में ही डेटा विश्लेषण कर जांचों को समय पर पूरा किया जा सकता है। वर्तमान समय में कई जांचों आए अच्छे परिणामों से न्यायालयों में मजबूत आधार रखा जा सका है। उन्होंने विशेष रूप से कानून प्रवर्तन एजेंसियों व अन्य विभागों में डेटा आदान-प्रदान को भी महत्वपूर्ण बताया। साइबर सुरक्षा के ज्ञात अज्ञात खतरों पर ज्वाइंट डायरेक्टर इंटेलीजेंस ने अपनी बात कही। कहा, आईपी कैमरा के नेटवर्क को सुरक्षित करना साइबर सुरक्षा का महत्वपूर्ण पहलू है।
सत्र 2: मांग में कमी लाकर ड्रग्स सप्लाई को किया जा सकता है कमजोर
एडीजी अपराध एवं प्रवर्तन चेन्नई महेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि ड्रग्स की मांग में कमी लाने के बाद इसकी सप्लाई को कमजोर किया जा सकता है। उन्होंने ड्रग्स तस्करों के नेटवर्क पर हुई कार्रवाई का प्रस्तुतिकरण दिया। आईआरएस एसडी जंबोडकर ने ड्रग्स तस्करी पर कहा कि इन दिनों अपराधी सोशल मीडिया, ड्रोन नेटवर्क, कुरियर सर्विस का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में इसकी रोकथाम के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने की जरूरत है। एपीसीए वेल्लोर ने डॉ. बिलाह इमेन्युअल ने नार्को नक्सलवाद पर प्रस्तुतिकरण दिया।
सत्र 3: सीएपीएफ और पुलिस समन्वय का उदाहरण है कुंभ मेला
पुलिस और सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) के बीच समन्वय पर आयोजित तीसरा सत्र हुआ। महानिदेशक कारागार उत्तर प्रदेश एसके सबत ने शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था के लिए राज्य पुलिस और सीएपीएफ के बीच परस्पर समन्वय पर जोर दिया। इसका सबसे अच्छा उदाहरण उन्होंने विभिन्न कुंभ मेलों के आयोजन को बताया। डिप्टी कमांडेंट संसद ड्यूटी ग्रुप विनोद कुमार और सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट आकाश सक्सेना ने कहा कि पुलिस को संवेदनशील, सुशासित और तकनीकी रूप से दक्ष होना आवश्यक है।