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Dehradun News: विवाद बढ़ने पर शपथपत्र से हटाया कोर्ट न जाने वाली शर्त

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Iशपथ पत्र में सरकारी आदेश व निर्माण को लेकर कोर्ट में वाद दायर न करने की रखी गई है शर्तI
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नगर निगम की ओर से भवन कर जमा करने के लिए बस्तीवासियों से जो शपथ पत्र लिया जा रहा है, उसने भवन स्वामी की ओर से निर्माण के संबंध और किसी भी सरकारी आदेश के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर नहीं करने की शर्त रखी गई है। इस शर्त के विरोध में पहले कांग्रेस तो अब भाजपा पार्षद भी मुखर हो गए थे। जिसके बाद मेयर और नगर आयुक्त ने पार्षदों के साथ बैठक कर इस शर्त को शपथ पत्र से हटा दिया है।

दरअसल, नगर निगम इस समय मलिन बस्तियों से हाउस टैक्स वसूल रहा है। टैक्स वसूलते समय बस्तीवासियों से 2016 से पहले का बिजली-पानी का बिल जमा करने के साथ ही एक शपथ पत्र लिया जा रहा है। शपथ पत्र में सात बिंदु दिए गए हैं। आखिरी बिंदु में शर्त रखी गई है कि भवन स्वामी किसी भी सरकारी आदेश के खिलाफ कोई वाद दायर नहीं कर सकता है। इसे लेकर दो दिन पूर्व राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष अशोक वर्मा ने मेयर से मुलाकात कर इसे शपथ पत्र से हटाने की मांग की थी। बुधवार को भाजपा पार्षद भूपेंद्र सिंह कठैत के नेतृत्व में पार्षदों ने मेयर सुनील उनियाल गामा और नगर आयुक्त मनुज गोयल से मुलाकात की और शर्त को हटाने की मांग की। मेयर सुनील उनियाला गामा और मनुज गोयल ने शर्त हटाने पर सहमति जताई। मेयर और नगर आयुक्त ने कहा कि निगम की ओर से संशोधित शपथ पत्र जारी किए जाएंगे। बाकी सभी बिंदु यथावत रखे जाएंगे।
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Iबिजली-पानी के कनेक्शन लेने की शर्तें भी होगी संशोधितI



देहरादून। बस्तियों में बिजली-पानी कनेक्शन की शर्तों में भी अब संशोधन होगा। इसके लिए नगर आयुक्त बिजली और जलसंस्थान को दोबारा से पत्र लिखेगें। दरअसल, नगर निगम वर्ष 2016 से पूर्व के बस्तियों को ही वैध मान रहा है। टैक्स जमा करने में भी 2016 से पूर्व के बिजली-पानी के कनेक्शन के बिल ही लिए जा रहे हैं। इसके अलावा नगर आयुक्त ने कुछ माह पहले जलसंस्थान और बिजली विभाग को पत्र लिखा था। जिसमें निगम के बिना एनओसी के बस्तियों में नए कनेक्शन न देने की बात कहीं गई थी। भाजपा पार्षदों ने इस पर आपत्ति जताई थी। जिसके बाद मेयर सुनील उनियाल गामा ने नगर आयुक्त को इस संबंध में दोनों विभागों को दोबारा पत्र लिखने को कहा।
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