- राज्यपाल ने विजय दिवस पर शौर्य स्थल पहुंचकर दी श्रद्धांजलि
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने मंगलवार को विजय दिवस पर शौर्य स्थल में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सेवारत एवं पूर्व सैनिकों से भेंटकर उनसे संवाद किया। राष्ट्र की रक्षा में उनके अमूल्य योगदान की सराहना की।
राज्यपाल ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की ऐतिहासिक, रणनीतिक एवं निर्णायक सैन्य विजय को स्मरण करते हुए कहा कि यह युद्ध भारत के सैन्य इतिहास में स्वर्णिम अध्याय है। भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्वितीय शौर्य, साहस और कुशल रणनीति का परिचय देते हुए न केवल दुश्मन के 93,000 सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए विवश किया बल्कि पाकिस्तान के विभाजन के साथ एक नए राष्ट्र, बांग्लादेश के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त किया। राज्यपाल ने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों की उत्कृष्ट रणनीति, कठोर प्रशिक्षण, सटीक योजना, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता हम सभी के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शक है।
राज्यपाल ने कहा कि 54 वर्ष पूर्व इस युद्ध में शहीद हुए एवं घायल हुए जवानों के परिवारों की देखभाल करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। विजय दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम सदैव उनके परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए तत्पर रहेंगे। आज भारत आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार, भविष्य के युद्ध कौशल और सैन्य क्षमताओं के क्षेत्र में एक व्यापक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। यह परिवर्तन हमारे सशस्त्र बलों की शक्ति और राष्ट्र की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करेगा। विजय दिवस केवल अतीत की विजय को स्मरण करने का दिन नहीं बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का अवसर भी है। इस अवसर पर जीओसी सब एरिया मेजर जनरल एमपीएस गिल, संयुक्त मुख्य हाइड्रोग्राफर रियर एडमिरल पीयूष पौसी सहित सेवारत और भूतपूर्व सैन्य अधिकारी, जेसीओ और जवान मौजूद रहे।