किसान इन्हें सौ रुपये प्रति किलो तक में बेचते हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण में तेलंगाना, बंगलूरू और उत्तर प्रदेश के लोगों ने मछली (थाई मांगुर) को बैन करने के लिए रिट डाली थी। इसके बाद आईसीएआर (इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च) के तहत एनबीएफजीआर ने थाई मांगुर के टेस्ट रिपोर्ट में पाया कि इससे जल तंत्र और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए यह मछली खतरा है। मालूम हो कि तालाबों में इस मछली से अन्य मछलियों को बीमारी भी हो जाती है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने थाई मांगुर की प्रजाति के पालन और प्रजनन को प्रतिबंधित करते हुए विनिष्टीकरण की कार्यवाही करने के आदेश दिए हैं। डीएम की ओर से मत्स्य विभाग से एक टास्क फोर्स का गठन करने कहा गया है। जिले के तालाबों में अगर थाई मांगुर पाई जाएगी तो उसे नष्ट किया जाएगा। साथ ही थाई मांगुर को पालने वाले किसान को टास्क फोर्स टीम को जुर्माना देना होगा।
- एसके छिम्वाल, सहायक निदेशक मत्स्य