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आपकी इनकम नहीं टैक्स बढ़ाएगे किरायेदार

Sun, 10 Nov 2013 10:11 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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यदि आपने अपने घर का कुछ हिस्सा किराये पर दे रखा है तो आपको दस प्रतिशत अतिरिक्त हाउस टैक्स देना होगा। नगर निगम ने उन घरों पर टैक्स रेट जारी किए हैं, जहां किरायदार रहते हैं।
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टैक्स की वसूली के लिए किराये पर दिए गए घरों को तीन श्रेणी में बांटा गया है। पहली श्रेणी में ऐसे घर हैं, जिनका अपने किरायेदारों के साथ एग्रीमेंट है। इसमें ऐसे घरों को शामिल किया जाएगा जहां बैंक, सरकारी अथवा गैर सरकारी प्रतिष्ठान चल रहे हैं।

किराये के आधार पर टैक्स
दूसरी श्रेणी में वह मकान आएंगे जहां पर मकान मालिक अपने किरायेदारों को किराये के बदले में रसीद देते हैं। ए और बी श्रेणियों में एग्रीमेंट और रसीद में किराये का उल्लेख होता है। जितना किराया रसीद में दर्ज होगा, उसी आधार पर उसका हाउस टैक्स एसेसमेंट किया जाएगा। फिर उसमें दस फीसदी अतिरिक्त जोड़कर टैक्स लिया जाएगा।
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तीसरी श्रेणी में ऐसे भवन आते हैं जहां पर मकान मालिक किरायेदारों से न तो एग्रीमेंट किए हैं और न ही रसीद देते हैं। ऐसे मकानों का निगम द्वारा तय हाउस टैक्स की श्रेणी में जो टैक्स बनता है उसमें दस प्रतिशत अतिरिक्त जोड़ दिया जाएगा।

मालामाल होगा निगम
देहरादून नगर निगम के अनुमान के मुताबिक शहर में सवा लाख ऐसे घर हैं जिनसे निगम को हाउस टैक्स लेना है। इन घरों से निगम को सालाना करोड़ों रुपए का फायदा होगा। नगर निगम यदि एक घर से हाउस टैक्स के रूप में 200 रुपये भी वसूलता है तो उसे सालाना ढाई करोड़ रुपए मिलेगा।

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हालांकि, चारों श्रेणी के हिसाब से निगम को दस करोड़ से ज्यादा मिल सकते हैं। हाउस टैक्स से होने वाली आय से नगर निगम अपने पांव पर खड़ा हो सकता है। वह शहर के विकास के लिए योजनाएं बना सकता है।

हाउस टैक्स देने का लाभ
हाउस टैक्स नहीं वसूले जाने से नगर निगम क्षेत्र में रह रहे लोगों को कामर्शियल रेट पर भवन का वाटर टैक्स देना पड़ रहा है। निगम हाउस टैक्स वसूलने लगेगा तो ऐसे लोगों को काफी राहत मिल सकती है। इसी तरह हाउस टैक्स नहीं वसूलने से संपत्ति को बेचने में काफी दिक्कतें आती हैं।

संपत्ति का बंटवारा करने में भी कई तरह की परेशानियां होती हैं। यही नहीं किसी की भी संपत्ति पर कोई भी कब्जा करके उसे विवादित कर देता है। हाउस टैक्स देने से इस सभी समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा। इसके अलावा कालोनी के विकास का जिम्मा नगर निगम के पास होगा। निगम के पास बजट होगा तो वह गलियों, सड़कों, नालियों, पार्कों और फुटपाथों का बेहतर निर्माण और उनकी देखरेख कर सकेगा।

इन्हें सबसे अधिक परेशानी
नगर निगम द्वारा मकानों का हाउस टैक्स नहीं वसूलने से सबसे ज्यादा परेशानी उन गांवों के लोगों को आ रही है जिन्हें हाल ही में नए परिसीमन के तहत नगर निगम क्षेत्र में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों का न तो विकास हो पा रहा है न ही यह अपनी संपत्ति को बेच पा रहे हैं। यही नहीं बैंक से कर्ज नहीं मिलने की वजह से यह अपने घर को बना भी नहीं पा रहे हैं।
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