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पुलिसकर्मियों को लेकर हाईकोर्ट के फैसले से विभाग के सामने खड़ी हुई नई मुसीबत, होगी ये परेशानी

Wed, 16 May 2018 07:53 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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पुलिसकर्मियों से आठ घंटे ड्यूटी कराने के संबंध में आए हाईकोर्ट के निर्णय पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की त्वरित प्रतिक्रिया यही रही कि कोर्ट के आदेश के अनुपालन की स्थिति में राज्य में कम से कम 10 हजार पुलिसकर्मियों की जरूरत होगी। मंगलवार को इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में गहमा-गहमी का माहौल रहा। अधिकारियों की तत्काल प्रतिक्रिया यह भी रही कि अभी तो फैसले की कॉपी मिली नहीं, अध्ययन के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।   

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हाईकोर्ट नैनीताल ने हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदौरिया की याचिका पर पुलिसकर्मियों से आठ घंटे ड्यूटी कराने का फैसला सुनाया है। इसके साथ ही कई और निर्देश भी दिए हैं। अदालत के इस निर्णय को लेकर अधीनस्थ पुलिसकर्मी खुश तो वरिष्ठ इन आदेशों की तामीली को लेकर चिंतित नजर आए। अभी इस संबंध में कोई अधिकारिक बैठक तो नहीं बुलाई गई, मगर फैसले का किस तरह अक्षरश: पालन हो, इसके लिए विकल्पों पर चर्चा होती रही।

बता दें कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की पुलिस स्ट्रेंथ, एक्सपेंडीचर एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर विषय पर आई एक रिपोर्ट में उत्तराखंड के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यहां प्रति 100 किलोमीटर के दायरे में पुलिसकर्मियों की संख्या यानी पुलिस घनत्व महज 34.5 (2001 से 2011 तक) है। यह राष्ट्रीय अनुपात 52.4 से भी कम है। इस मामले में उत्तराखंड का नंबर पूरे देश में 28वां (संघ शासित प्रदेश भी शामिल) है। ऐसे में अगर उत्तराखंड पुलिस के अधिकारिक सूत्रों की मानें तो फैसले के पालन के लिए कम से कम 10 हजार पुलिसकर्मियों की और जरूरत होगी।
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क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी

uttarakhand police
क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी

फैसला पुलिसकर्मियों और उनके परिवार के हक में है, इसलिए स्वागत योग्य है। अभी फैसले का अध्ययन किया जाएगा, फिर इस संबंध में सरकार के साथ बैठक कर कोई निर्णय लिया जाएगा।
-अशोक कुमार, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर

फैसले की प्रति मिलने के बाद अधिकारियों की बैठक जल्द ही होगी। इस फैसले को कैसे लागू किया जाए इसके लिए मुख्यालय और सरकार के बीच वार्ता के बाद ही कुछ निर्णय निकलेगा।
-दीपम सेठ, आईजी, लॉ एंड ऑर्डर

बोले सेवानिवृत्त अधिकारी
फैसला स्वागत के योग्य है। मगर ये कहने में कोई गुरेज नहीं है कि पुलिस जॉब अनिश्चितता की जॉब है। कुछ भी निश्चित नहीं है। ऐसे में काम को आठ घंटे में किस तरह बांटा जाएगा यह एक चुनौती होगी।
-वीकेएस कार्की, रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी

हाईकोर्ट के फैसले का हर पुलिसकर्मी स्वागत करता है। यदि ऐसा संभव हो पाता है तो पुलिस के तौर-तरीकों में भी बदलाव आएंगे। अब सब कुछ पहले की तरह नहीं होता है, लिहाजा बदलाव तो जरूरी हैं।
-एसएस बिष्ट, रिटायर्ड इंस्पेक्टर
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