मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री को बताया कि 126 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के लिए वन भूमि परिवर्तन को मंजूरी मिल गई है। 167 हेक्टेयर निजी भूमि का अधिग्रहण हो गया है। परियोजना के लिए जियो टेक्निकल इंवेस्टिगेशन भी पूरा कर लिया है। एक आरयूबी (रोड अंडर ब्रिज) एवं एक आरओबी (रोड ओवर ब्रिज) तैयार हो चुका है।
दून-हरिद्वार के बीच डबल रेल लाइन
मुख्यमंत्री ने हरिद्वार-देहरादून के मध्य डबल रेल लाइन का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश में भारी माल लादने व उतारने और कंटेनरों से लदे रेल वैगनों के रुकने के लिए एक रेल कंटेनर डिपो स्थापित किया जाना चाहिए। देहरादून व ऋषिकेश स्टेशन के बीच सीधी रेल सेवा उपलब्ध कराने के लिए लक्सर की भांति रायवाला स्टेशन से पहले डाइवर्जन लाइन का निर्माण भी होना चाहिए।
तीन नई रेल लाइनों की रखी मांग
मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री से लालकुंआ-खटीमा, टनकपुर-बागेश्वर और काशीपुर-धामपुर में नई रेल लाइनें स्वीकृत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि तीनों रेल लाइनों का पर्वतीय क्षेत्र के विकास और सामरिक दृष्टि से काफी महत्व है। उन्होंने लालकुआं- शक्तिफार्म- सितारगंज- खटीमा रेल परियोजना निर्माण के लिए शत प्रतिशत फंडिंग की मांग केंद्र से की।