ग्राम प्रधान के अनुसार परियोजना प्रबंधन, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुए समझौते में यह तय किया गया था कि परियोजना बनने के बाद ग्रामीणों की कृषि भूमि के लिए पूरे वर्ष पानी उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही यदि किसी आपदा से सिंचाई नहर को नुकसान पहुंचता है तो उसकी मरम्मत कराकर 12 महीने पानी उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन 13 वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक सिंचाई व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी।
उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना द्वारा रोजगार देने का वादा भी पूरा नहीं किया गया। पिछले 19 वर्षों में गांव के किसी बेरोजगार युवक को रोजगार नहीं मिला और न ही सीएसआर मद से गांव में कोई विशेष विकास कार्य कराया गया।
ग्राम प्रधान ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सिंचाई विभाग के माध्यम से गांव की सिंचाई नहर (गूल) का शीघ्र निर्माण कराया जाए, ताकि गांव की बंजर भूमि फिर से उपजाऊ बन सके और ग्रामीण दोबारा खेती कर सकें। साथ ही परियोजना और ग्रामीणों के बीच हुए अनुबंध की जांच कर उचित कार्रवाई करने की भी मांग की गई है।
वहीं क्षेत्रीय विधायक शक्ति लाल शाह ने भी ग्रामीणों की समस्या को गंभीर बताते हुए उत्तराखंड के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज को पत्र भेजकर मामले में कार्रवाई की मांग की है।