तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में संघर्ष कर देश भर में चर्चा में आने वाली सायरा बानो को पति ने ऐसी धमकी दी कि सायरा अपना आपा खो बैठी।
न्यायालय में पेशी पर आए पति और उसके दोस्त की देख लेने की धमकी से बिफरी तीन तलाक की याचिकाकर्ता सायरा बानो पर कोर्ट परिसर में पति रिजवान को तमाचा जड़ने का आरोप लगा है।
विवाद बढ़ने पर पुलिस कर्मी सायरा को अपने साथ ले गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ आईटीआई थाने में तहरीर दी है। खबर लिखे जाने तक रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी है।
26 फरवरी को बच्चों को पेश करने के निर्देश
कोर्ट
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तीन तलाक के विरोध को लेकर चर्चा में आई आरटीएस डिपो हेमपुर निवासी सायरा बानो पुत्री इकबाल ने काशीपुर परिवार न्यायालय में चार जुलाई 2017 को अपने पति करेली (इलाहाबाद) निवासी रिजवान पुत्र इकबाल के विरुद्ध भरण पोषण वाद दायर किया था।
उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बच्चों से मिलवाने के लिए काशीपुर परिवार न्यायालय में अर्जी लगाई। इस मामले में परिवार न्यायालय ने विपक्षी रिजवान को तलब किया।
मंगलवार को रिजवान कोर्ट में पेश हुआ। कोर्ट ने उसे 26 फरवरी को बच्चों को अदालत के सम्मुख पेश करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 26 फरवरी नियत की है।
जान से मारने और बच्चों को देख लेने की धमकी दी
shayara bano
कोर्ट से बाहर निकलने के बाद सायरा और उसके पति के बीच नोकझोंक शुरू हो गई। आरोप है कि पति के दोस्त अयाज ने सायरा को जान से मारने और बच्चों को भी देख लेने की धमकी दी तो सायरा ने पुलिस को सूचना दी।
मौके पर आईटीआई थाने के उपनिरीक्षक महेश्वर सिंह और सुप्रीया नेगी कोर्ट पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्ष आपस में भिड़ गए। आरोप है कि धमकी से गुस्से से भरी सायरा ने पति को थप्पड़ जड़ दिया।
सायरा ने उपनिरीक्षक को पति और उसके मित्र के खिलाफ तहरीर भी सौंपी। उधर, रिजवान ने फैक्स से एसएसपी को शिकायत भेजकर सायरा, उसके पिता इकबाल, भाई शकील और एक पत्रकार पर मारपीट व धमकाने का आरोप लगाया है। रिजवान का कहना है कि अधिवक्ता के चैंबर पर सायरा ने पुलिस व अधिवक्ताओं की मौजूदगी में उनके साथ मारपीट की।
न्यायालय में बच्चों से मिलवाने की अर्जी दी थी
shayara bano
पति की ओर से दायर हक-ए-जोजियत (पत्नी पर पति के अधिकार) के मुकदमे में स्थगनादेश के लिए सायरा बानो सुप्रीम कोर्ट गई थी। उसने अपने बच्चों से मिलवाने के लिए अदालत में अपील की थी।
इस मामले में दायर याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की दो सदस्यीय पीठ ने की।
पीठ ने बच्चों की कस्टडी को लेकर दायर याचिका की सुनवाई करते हुए एक मार्च 2017 को व्यवस्था दी कि इस मामले में सायरा काशीपुर परिवार न्यायालय में अर्जी दे सकती है। इस पर सायरा ने अपने अधिवक्ता विनोद पाल के माध्यम से यहां परिवार न्यायालय में बच्चों से मिलवाने की अर्जी दी थी।